माया राज में चीनी मिल बिक्री की आड़ में भ्रष्टाचार की जड़े जनपद में भी जमीं हैं। तत्कालीन हुक्मरानों ने घाटे का हवाला देते हुए नगर की पन्नीनगर शुगर मिल को महज 29 करोड़ रुपये में वेव ग्रुप को बेच दिया था। खासबात यह है कि बिक्री के समय मिल में चीनी का स्टॉक ही आठ करोड़ रुपये का था।
शुगर मिल की बिक्री से 60 हजार किसानों और हजारों कर्मचारियों-उनके परिवारों को बदहाली झेलनी पड़ी थी। सैकड़ों कर्मचारी परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच गए थे। नौकरी छूट जाने से कई परिवार के बच्चों को शिक्षा बीच में छोड़नी पड़ी थी। परेशान कर्मचारियों ने छठ मेला और दिवाली भी नहीं मनाए थे।
शुगर मिल को कौड़ियों के भाव खरीदकर जहां मालामाल हो गए, वहीं तत्कालीन अफसरों की भी बल्ले-बल्ले हुई थी। सरकार के नजदीकियों के साथ मिलकर अधिकारियों ने भी मनमानी की थी। किसानों को बिना किसी पूर्व सूचना के मिल बंद कर दी गई थी। इससे 60 हजार किसान प्रभावित हुए थे।
उनको प्रशासन ने दूर-दराज की शुगर मिलों पर अटैच किया था। मिल बिक्री से सबसे ज्यादा बदहाली कर्मचारियों और उनके परिवारों ने झेली थी। लंबे समय से न्याय की लड़ाई लड़ रहे कर्मचारियों ने खरीदारों की मंशा के अनुरूप इसके 300 बीघा क्षेत्रफल पर आवासीय कालोनी तो नहीं बनने दी, लेकिन उनको रोजी-रोटी का जरिया हाथ नहीं लगा है।
अब मिल बिक्री की जांच शुरू होने के बाद लगने लगा है कि इस सौदेबाजी के पीछे की हकीकत सामने आ सकेगी।
जिस समय साजिश रचकर मिल को बंद किया गया था, उस समय किसानों ने धरना प्रदर्शन कर विरोध दर्ज कराया था। मिल को चालू नहीं किया गया। मिल की जमीन पर फ्लैट बनाकर बेचना चाहता है। किसान ऐसा होेने नहीं देंगे। - मांगे राम त्यागी, प्रदेश सचिव भाकियू