समाजवादी पार्टी ने जिले की अंतिम बची सीट स्याना पर भी अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया है। पार्टी ने स्याना विधानसभा से दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री डॉ. राजीव लोधी को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। पार्टी अब जिले की सातों विधानसभा सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।
समाजवादी पार्टी ने शुक्रवार को लोध बाहुल्य स्याना विधानसभा सीट से पार्टी नेता और प्रदेश सरकार में पेंशन सलाहाकार डॉ. राजीव लोधी को प्रत्याशी घोषित किया है। बता दें कि डॉ. राजीव लोधी की मां हितेश कुमारी भी सपा में ही महिला सभा की राष्ट्रीय सचिव हैं और वह प्रदेश सरकार में सिंचाई मंत्री भी रह चुकी हैं।
डॉ. राजीव पिछले काफी समय से डिबाई विधानसभा सीट पर सक्रिय थे। तब संभावना थी कि डॉ. राजीव को सपा डिबाई से अपना प्रत्याशी घोषित करेगी, लेकिन भाजपा छोड़कर सपा में शामिल हुए हरीश लोधी को पार्टी ने प्रत्याशी घोषित कर दिया था। जिले की डिबाई और स्याना विधानसभा सीट लोध बाहुल्य सीट हैं।
इसी को देखते हुए सपा ने दोनों सीटों पर लोध बिरादरी से ताल्लुक रखने वाले दावेदार को पार्टी का प्रत्याशी बनाया है। डॉ. राजीव के स्याना सीट से प्रत्याशी घोषित होने के बाद अब सभी सातों सीटों पर सपा के प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं।
टिकट वापसी की नौबत बन रही सपा में..
अखिलेश यादव के सपा से निष्कासन के बाद जिले में भी पार्टी के दो फाड़ होने की संभावना है। कार्यकर्ताआ में बिखराव आना तय है। युवा वर्ग जहां सीएम अखिलेश यादव के साथ चला जाएगा वहीं, पुराने लोग नेता जी के साथ निभाएंगे। वहीं, मौजूदा घटनाक्रम से सपा के स्थानीय नेताओं में हड़कंप मचा है।
नेता और कर्ताओं को सपा में भविष्य की चिंता सताने लगी है। विधानसभा उम्मीदवार तक यह सोचने को मजबूर है कि वह चुनाव लड़े या नहीं। नाम नहीं छापने की शर्त पर एक प्रत्याशी ने बताया कि यदि एक-एक विधानसभा में सपा के दो दो उम्मीदवार होंगे तो जीतना तो दूर जमानत बचाना भी मुश्किल पड़ जाएगा। ऐसे में टिकट वापसी की संभावनाएं भी बन सकती है।
लखनऊ तलब किए गए सभी प्रत्याशी
अखिलेश यादव के निष्कासन के बाद जिले में भी सपा बिखराव के कगार पहुंच चुकी है। ऐसे में जिले के नेता यह नहीं समझ पा रहे वह किस खेमे जाएं टीपू के और नेता जी के। सही तौर पर अब सपा युवा और बुजुर्गों के रूप में बंट गई है। जिले के युवा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ है। वहीं प्रत्याशियों को अपनी चिंता सता रही है।
सपा ने रात आठ बजे अपने प्रत्याशियों को लखनऊ तलब किया है। टिकटों की रार से बिखरी से सपा अब कार्यकर्ताओं के बीच भी बंट चुकी है। अखिलेश यादव के छह साल के निष्कासन के बाद युवा अपने मुख्यमंत्री पर भरोसा जता रहे हैं। सपा का युवा वर्ग अखिलेश के साथ जाने को तैयार है, हालांकि लखनऊ में हुए घटनाक्रम के बाद जिले के खासकर पुराने नेता संशय के स्थिति में पहुंच चुके हैं।
वह समझ नहीं पा रहे हैं कि वह किस ओर जाएं। पार्टी पूरी तरह दो फाड़ नजर आ रही है। हालांकि कई साल पार्टी की सेवा कर रहे नेता मामले में कुछ भी बोलने तैयार नहीं है। वह खुद दुविधा में है और अपना नफा-नुकसान भी देख रहे हैं। वहीं घोषित प्रत्याशी खुद को संकट की स्थिति में महसूस कर रहा हैं।
अभी वह यह नहीं समझ पा रहा है कि वह सपा से है या नई से पार्टी जुड़ेगा, लेकिन वह जरूर है कि सपा में बिखराव के बाद अब सीट निकालनी बेहद मुश्किल होगी। क्योंकि मुस्लिम वोट अब मुलायम और अखिलेश के बीच बंट जाएगा।
हालांकि अब सब लोग यह देखना चाहते हैं कि क्या अखिलेश नई पार्टी बनाएंगे। इसके वाद ही निर्णय लेंगे कि वह कहां जाएंगे। मचे हंगामे के बीच सपा ने अपने घोषित प्रत्याशियों और जिला पदाधिकारियों को लखनऊ तलब किया है। जिले से प्रत्याशी शुजात आलम, स्राजीव लोधी, रविंद्र वाल्मीकि, हरीश लोधी आदि रात में ही लखनऊ के लिए रवाना हो गए।
बोले नेता
मैं समाजवादी पार्टी का सिपाही हूं और पार्टी के साथ ही हूं। हालांकि जो हुआ है वह अत्यंत दुखद है। अंतिम निर्णय नेता जी को लेना है। मैं अभी लखनऊ जा रहा हूं। - शुजात आलम, प्रत्याशी सदर
सभी प्रत्याशियों को पार्टी ने लखनऊ किया है।
वह शुक्रवार रात रवाना हो चुके हैं। लखनऊ के घटनाक्रम ने दुखी किया है। यह पार्टी के भविष्य के लिए अच्छा नहीं है। पार्टी के बड़े नेताओं को इस बारे में गंभीरता से सोचना होगा। - दिनेश गुर्जर, जिलाध्यक्ष सपा