बुलंदशहर। डाक विभाग में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाने का मामला सामने आया है। ग्रामीण डाक सेवक पद पर चयनित 70 अभ्यर्थियों में से छह के प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाए गए हैं। डाक अधीक्षक का पत्र मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
भारतीय डाक विभाग में वर्ष 2022-23 में ग्रामीण डाक सेवक (जीडीएस) की भर्ती निकली थी। जनपद में 130 पद थे। हाईस्कूल में प्राप्तांक के आधार पर मेरिट लिस्ट तैयार कर 70 अभ्यर्थियों का चयन किया गया था। इसके बाद विभाग ने आवेदन और शैक्षिक प्रमाण पत्रों की जांच शुरू की।अमरोहा जिले के गांव सुतावली निवासी शिवकुमार, संभल जिले के ग्राम नरौदा निवासी तालेवर सिंह, संभल के गांव कनैटा निवासी हिमांशु और ज्योति, बुलंदशहर निवासी श्रीप्रभा और चिराग के 10वीं के प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए हैं। तीन आवेदकों ने हल्द्वानी के महात्मा गांधी इंटर कॉलेज के एक ही वर्ष के 10वीं के प्रमाणपत्र लगाए हैं। तीनों के अनुक्रमांक भी एक ही क्रम में हैं। डाक अधीक्षक त्रिभुवन सिंह ने बताया कि बोर्ड ने लिखकर दिया है कि संबंधित का विवरण विद्यालय के अभिलेख में दर्ज नहीं है। इसके बाद सभी छह अभ्यर्थियों के आवेदन निरस्त कर कार्रवाई के लिए पुलिस को पत्र भेजा गया है।
बुलंदशहर में पहले भी हुआ है फर्जीवाड़ा
जिले में पिछले दिनों शिक्षा विभाग में भी छह शिक्षक-शिक्षिकाएं फर्जी प्रमाण पत्रों पर नौकरी कर रहे थे। जांच में पकड़े जाने पर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर रिकवरी के आदेश हुए थे।