बुलंदशहर में हुई यूरिया की किल्लत, किसान परेशान
बुलंदशहर। खरीफ के सीजन में जनपद में यूरिया की कमी आड़े आने लगी है। इसके चलते किसान परेशान हैं। तीन अगस्त को आने वाली रैक को भी मेरठ रेफर कर दिया गया, जबकि किसान यूरिया के लिए मारे-मारे भटक रहे हैं। विभागीय अफसरों ने अब इस समस्या को दूर करने के लिए डीएम को जनपद में यूरिया उपलब्ध करवाने के लिए पत्र लिखा है।
बुलंदशहर प्रदेश का कृषि प्रधान जनपद है। यहां पर 3.75 लाख हेक्टेयर भूमि में फसल उगाई जाती है, जबकि लगभग चार लाख किसान खेती से जुड़े हुए हैं। इस समय लगभग 65 हजार हेक्टेयर में गन्ना और 96 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि में धान की फसल उगाई गई है, जबकि शेष भूमि में सब्जी, मक्का, ज्वार, दलहन आदि की फसल उग रही है। इस समय सभी फसलों के लिए यूरिया की सबसे ज्यादा जरूरत है, जबकि इसी बीच यूरिया की कमी किसानों के सामने आड़े बनकर खड़ी हो गई है। अफसरों का कहना है कि जनपद में यूरिया की कमी नहीं होती। तीन अगस्त को आने वाली तीन मीट्रिक टन यूरिया की रैक को मेरठ रेफर कर दिया गया। इसके चलते जनपद में यूरिया की कमी खलने लगी है। इस कमी को दूर करने के लिए डीएम रविंद्र कुमार को जनपद में खाद की रैक उपलब्ध करवाने के लिए पत्र लिखा है।
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ये है जनपद में यूरिया की स्थिति
जनपद में इफको और कृभको खाद किसानों को उपलब्ध करवाया जाता है। 45 किलोग्राम के प्रति यूरिया बैग की कीमत 266.50 निर्धारित है। जनपद में 147 समिति संचालित हैं। अफसरों ने बताया कि इस बार जनपद को 39 हजार 761 मीट्रिक टन यूरिया का लक्ष्य दिया गया था। इसमें से लगभग 31 हजार मीट्रिक टन यूरिया प्राप्त हो गया है। गत 29 जुलाई को दो हजार मीट्रिक टन यूरिया की रैक आई थी। इसे जरूरत वाली समितियों को भेज दिया गया था, जबकि तीन अगस्त को तीन हजार मीट्रिक टन की रैक यदि जनपद में पहुंच जाती तो किसानों के सामने यूरिया की कमी नहीं होती। इस समय जनपद में 50 से अधिक समितियों पर यूरिया नहीं है। यह समिति गुलावठी और शिकारपुर क्षेत्र के अलावा जनपद के अलग-अलग हिस्सों में संचालित है।
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बोले किसान =
गुलावठी क्षेत्र के ग्राम भटौना और छपरावत समिति में करीब एक सप्ताह से यूरिया नहीं मिलने से किसान परेशान हैं। यूरिया खाद सोसायटी पर नहीं है। जिससे किसान परेशान हैं। इस समय गन्ना और धान की फसल के लिए यूरिया की बेहद जरूरत है।
- चौ. वीरपाल सिंह तेवतिया, भटौना
छपरावत साधन सहकारी समिति में करीब एक सप्ताह पूर्व यूरिया आया। अब यूरिया खत्म हो गया है और किसान यूरिया के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। यदि इस समय यूरिया नहीं मिला तो किसानों की फसल चौपट हो जाएंगी।
- अशोक शर्मा, छपरावत
कोरोनाकाल में किसान कंगाली की कगार पर हैं। ऐसे में फसलों को यूरिया देने का एकमात्र सहारा सोसायटी ही रह जाती है। लेकिन सोसायटी पर यूरिया न मिलने से समस्याएं आड़े आ रही है। प्रशासन को किसानों की समस्या को दूर करना चाहिए।
- शेर सिंह, टोली नगला
किसान पहले से कंगाल हैं और अब यूरिया न होने से किसानों की परेशानी और बढ़ गई है। बाहर से यूरिया खरीदने पर अधिक दाम देने पड़ते हैं, सरकार एक तरफ तो किसानों के हित की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ यूरिया तक उपलब्ध नहीं करवा पा रही है।
- बबली त्यागी, हिरनौट
कोट =
जनपद में यूरिया की कमी का कारण समय पर रैक नहीं पहुंचना है। इस समस्या को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। यूरिया की रैक उपलब्ध करवाने के लिए डीएम रविंद्र कुमार को भी पत्र लिखा है। यूरिया की कमी को जल्द दूर कर दिया जाएगा।
- प्रदीप कुमार सिंह, एआर को-आपरेटिव बुलंदशहर