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भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए सजे शिवालय

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भोलेनाथ के जलाभिषेक के लिए सजे शिवालय
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बुलंदशहर। सावन मास के प्रथम सोमवार से भगवान भोलेनाथ के मंदिरों में घंटा घड़ियाल की गूंज सुनाई देगी। कोई शिव भक्त जलाभिषेक, कोई दुग्ध स्नान तो कोई धतूरे के साथ फल व फूल चढ़ाकर भगवान शिव की आराधना करेगा। सावन के पहले सोमवार को लेकर नगर समेत जनपदभर के सभी शिवालयों, मंदिरों पर तैयारियों पूरी कर ली गई हैं। शिवभक्तों ने भी शिव पूजन की तैयारी कर ली है।
हिंदू धर्म में सावन माह का विशेष महत्व होता है। इन दिनों लोग सात्विक खानपान और पूजा अर्चना में ही अपना समय व्यतीत करते हैं। ज्योतिषाचार्य के अनुसार सावन माह की शिवरात्रि को जहां विशेष महत्व माना गया है। वहीं, सावन माह में पड़ने वाले प्रत्येक सोमवार को शिवालयों में जलाभिषेक का चलन है। मान्यता है कि सावन में कांवड़ लाने और व्रत रखकर शिव की पूजा-आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। सावन मास में इस बार चार सोमवार पड़ेंगे। सावन के प्रत्येक सोमवार को शिवालयों में सुबह पांच बजे से ही जलाभिषेक के लिए भक्तों का आना-जाना शुरू हो जाएगा। भगवान शिव की आराधना के लिए मंदिरों को सजाया गया है। अधिकतर शिवालय बिजली की आधुनिक झालरों व अन्य उपकरणों से सजाए जा रहे हैं। साथ ही भगवान आशुतोष पर चढ़ाने के लिए मंदिरों के बाहर बेल पत्र, फूल और धतुरे की दुकानें लग गई हैं। गांव गंगेरूआ स्थित श्री द्वाद्वश महालिंगेश्वर महादेव मंदिर के अलावा नगर के प्राचीन राजराजेश्वर मंदिर, भवन मंदिर, भूतेश्वर मंदिर, कालेश्वर मंदिर, साठा देवी मंदिर, शीतलगंज स्थित शिवालय मंदिर, पंचशील कालोनी स्थित मंदिर, गौरीशंकर मंदिर, सिद्धेश्वर आदि मंदिरों पर जलाभिषेक किया जाएगा।
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पूजा में कम से कम पांच वस्तुओं का करें इस्तेमाल
सावन माह में भगवान शिव के भक्त व्रत, जप, शिव अभिषेक, शिव पूजन, शिव पुराण व कथा श्रवण आदि करते हैं। ज्योतिषाचार्य के अनुसार भगवान शिव की पूजा ऊँ नम: शिवाय मंत्र से की जाती है। भगवान शिव की पूजा कम से कम पांच वस्तुओं से करनी चाहिए। इनमें चंदन, पुष्प, बेलपत्र, धूप, दीपक और भोग शामिल हैं। ये सभी पांच वस्तुएं भगवान शिव को अवश्य अर्पण करनी चाहिए। पूजन करने के बाद एकांत स्थान में बैठकर 108 बार ऊं नम: शिवाय का जाप भी कर सकते हैं। पंडित नरेश शर्मा ने बताया कि भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए सावन माह का प्रत्येक दिवस विशेष महत्व वाला है। पार्थिव (मिट्टी) शिवलिंग बनाकर पूरे सावन भर उस पर धतूरा, भांग, बेलपत्र और दूध अवश्य अर्पित करें। भगवान शिव को नियमित दूध के दान से यश, वैभव और परिवार में सुख शांति की प्राप्ति होती है।
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7 किलोमीटर की परिक्रमा होगी शुरू
गांव गंगेरूआ स्थित श्री द्वादश महालिंगेश्वर सिद्ध महापीठ की 7 किलोमीटर की परिक्रमा सावन के चारों सोमवार को होगी। प्रत्येक सोमवार परिक्रमा का उद्देश्य अलग-अलग होगा। प्रथम सोमवार को जनपद की शांति के लिए भगवान का पूजन और परिक्रमा होगी। दूसरे सोमवार को प्रदेश शांति के लिए पूजन एवं परिक्रमा होगी। तृतीय सोमवार को राष्ट्र शांति के लिए पूजन एवं परिक्रमा होगी। इसी तरह आखिरी सोमवार को विश्व शांति के लिए पूजन एवं परिक्रमा होगी। सिद्धमहापीठ के संस्थापक आचार्य मनजीत धर्मध्वज ने बताया है कि परिक्रमा प्रात: 6:00 बजे से प्रारंभ होगी। इसमें सभी भक्त आत्म कल्याण, समाज कल्याण, समाज में शांति और भाईचारे के लिए भगवान का भजन और जप करते हुए परिक्रमा देंगे। सिद्ध महापीठ में पूरे भारत वर्ष के तीर्थों की मिट्टी ,कुडों ,सरोवरों और समुद्रों के जल के साथ में 12 ज्योतिर्लिंगों से शिवलिंग स्पर्श कराकर 12 शिवलिंग के साथ भगवान महालिंगेश्वर और इष्ट दीक्षा केंद्र में समस्त देवता विराजमान हैं। इस पीठ की परिक्रमा देने से कांवड़ का फल प्राप्त होगा।
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