बुलंदशहर। नयागांव स्थित प्राथमिक विद्यालय में फर्जी दस्तावेजों के सहारे शिक्षा मित्र की नौकरी हासिल करने वाली सविता को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने दोषी करार देते हुए छह साल के कठोर कारावास और 28 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा कि शिक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में इस तरह की धोखाधड़ी गंभीर अपराध है।
वर्ष 2019 में विकास क्षेत्र अगौता के नयागांव प्राथमिक विद्यालय में सविता ने इंटरमीडिएट के फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र के आधार पर शिक्षा मित्र के पद पर नियुक्ति प्राप्त कर ली थी। बताया गया कि सविता का विवाह वर्ष 2000 में हुआ था और ससुराल में ही रहने के दौरान उसकी नौकरी लगी थी। 2019 में जांच के दौरान जब दस्तावेजों की जांच कराई गई तो उसके प्रमाण पत्र फर्जी पाए गए। 29 जून 2019 को कोतवाली नगर पुलिस ने सविता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। विस्तृत जांच के बाद पुलिस ने अपनी जांच पूरी कर 23 सितंबर 2019 को न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल कर दिया था।
मामले की सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और पेश साक्ष्यों के आधार पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुनील कुमार त्रिपाठी की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सविता को दोषी करार दिया। साथ ही न्यायालय ने आरोपी सविता को छह साल के कठोर कारावास की सजा के साथ 28 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अदालत ने टिप्पणी की कि शिक्षा व्यवस्था में फर्जीवाड़ा न केवल सरकारी व्यवस्था को ठगने का अपराध है, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है।