गंगा स्नान के दौरान अचानक धंसी रेत, 4 फीट गहरे गड्ढे में समाए चार लोग
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बुलंदशहर के अनूपशहर के प्रसिद्ध मस्तराम घाट पर रविवार सुबह एक बड़ा हादसा टल गया। गंगा स्नान कर रहा एक ही परिवार के चार लोग अचानक रेत धंसने से गहरे पानी में समाने लगे। मौके पर मौजूद स्थानीय गोताखोरों और पीएसी फ्लड प्लाटून के जवानों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। उनकी त्वरित कार्रवाई और मुस्तैदी से कई जिंदगियां बच गईं।
बुलंदशहर नगर क्षेत्र के देवीपुरा निवासी भावेश (34) अपनी बड़ी बहन मृदुल (37) के साथ घाट पर पहुंचे थे। उनके साथ भांजा हार्दिक (16) और सात वर्षीय बेटी तक्षवि भी थी। सुबह करीब 8 बजे पूरा परिवार गंगा के पावन जल में स्नान कर रहा था। तभी अचानक भावेश और उनकी बेटी के पैरों तले की रेत खिसकने लगी।
देखते ही देखते दोनों लगभग 4 फीट गहरे गड्ढे में समाने लगे। अपनी भतीजी और भाई को डूबता देख बहन मृदुल उन्हें बचाने आगे बढ़ीं। पानी के तेज बहाव और धंसती रेत के कारण वह भी संतुलन खो बैठीं। मृदुल भी गहरे पानी में समाने लगीं। परिवार के अन्य सदस्य हार्दिक सहित सभी ने मदद के लिए चीख-पुकार मचाई।
तुरंत चलाया बचाव अभियान
घाट पर मची अफरा-तफरी और चीख-पुकार सुनते ही स्थानीय गोताखोर हर्ष ने तुरंत गंगा की धारा में छलांग लगा दी। उनके साथ पीएसी फ्लड प्लाटून के जवान भी तुरंत हरकत में आए। अन्य स्थानीय गोताखोर भी बचाव कार्य में जुट गए। सभी ने मिलकर एक संयुक्त रेस्क्यू अभियान चलाया। उन्होंने चारों लोगों को एक-एक कर सकुशल जलधारा से बाहर निकाल लिया। यह अभियान समय रहते पूरा किया गया।
परिवार की पहचान
बचाए गए लोगों में भावेश (34) शामिल थे। उनकी बड़ी बहन मृदुल (37) भी गहरे पानी में समा गई थीं। भावेश का भांजा हार्दिक (16) भी परिवार के साथ मौजूद था। भावेश की सात वर्षीय मासूम बेटी तक्षवि भी इस घटना का शिकार हुई थी। यह परिवार बुलंदशहर के देवीपुरा का निवासी है। वे गंगा स्नान के लिए अनूपशहर आए थे।
सुरक्षित बाहर आने के बाद पीड़ित परिवार ने राहत की सांस ली। उन्होंने अपनी जान पर खेलकर सभी की रक्षा करने वाले गोताखोर हर्ष का आभार व्यक्त किया। पीएसी जवानों और अन्य स्थानीय गोताखोरों का भी धन्यवाद किया गया। इस घटना से घाट पर मौजूद अन्य लोगों ने भी राहत महसूस की। यह एक बड़ा हादसा था जो टल गया।