बिटिया मामले में जांच भी खूब हो रही है और कार्रवाई भी। सीएम से लेकर डीएम तक कार्रवाई और जांच करा रहे हैं। अल्पसंख्यक आयोग ने भी बिटिया की रिपोर्ट तलब की है, लेकि बिटिया को न कार्रवाई की जरूरत है न जांच की दरकार। बिटिया को बेहतर उपचार चाहिए। बस वही उपचार बिटिया को नहीं मिल पा रहा है।
नगर के डीएम रोड स्थित झुग्गीपट्टी निवासी अख्तर की 12 वर्षीया बेटी चंादनी हाइटेंशन लाइन की चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गई थी। प्रशासन से लेकर कारपोरेशन तक सभी अफसरों ने उदासीनता बरती। अखिल भारतीय यादव महासभा के सचिव नितिन यादव द्वारा मामले की शिकायत मुख्यमंत्री से करने के बाद पूरा अमला हरकत में आ गया।
मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन स्तर से जांच बैठी तो बाल अधिकार आयोग, मानवाधिकारी आयोग, पावर कारपोरेशन के एमडी, विद्युत सुरक्षा निदेशालय, जिलाधिकारी ने रिपोर्ट तलब कर ली। अब मामले की रिपोर्ट अल्पसंख्यक आयोग ने तलब की है। रिपोर्ट पर रिपोर्ट तलब की जा रही हैं, अफसर कार्रवाई भी कर रहे हैं, लेकिन पीड़िता को उपचार नहीं मिल पा रहा है। बिटिया का उपचार जिले में संभव नहीं है, इसके बावजूद बिटिया आठ माह से उसी हालत में जिला अस्पताल में पड़ी हुई है।
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कोट्स
बिटिया को इस समय इलाज की जरूरत है। उसका बेहतर उपचार दिल्ली, नोएडा और बाहर हायर सेंटर में ही संभव है। बिटिया को रेफर कर दिया गया है, लेकिन बिटिया का पिता उसे नहीं ले जा रहा है। बिटिया को बेहतर उपचार की जरूरत है, तभी उसके जीवन की आस बंध सकती है।
डॉ. प्रीतम सिंह, सीएमएस, जिला अस्पताल