ट्रांसपोर्टर, ठेकेदार और गेहूं खरीदने वाली एजेंसियों में तालमेल की कमी के चलते करोड़ों रुपये का गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा हुआ है। 10 हजार मीट्रिक टन गेहूं बारिश में भीगने के बाद अब अफसरों को इसको बचाने की याद आई है।
कुछ केंद्रों से रविवार को गेहूं का उठान हुआ, जबकि कुछ अन्य केंद्रों पर गेहूं को ढकने का काम चला। पीसीएफ के अफसर सोमवार शाम तक खुले में पड़े गेहूं को गोदाम में भिजवाने का दावा कर रहे हैं।
जिले को शासन ने 1.04 लाख एमटी गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया था। सहकारी समिति, पीसीएफ, नैफेड, एफसीआई समेत पांच एजेंसियों को किसानों से गेहूं खरीदने की जिम्मेदारी सौंपी थी। सभी एजेंसियों ने किसानों से गेहूं खरीदने के लिए 103 क्रय केंद्र स्थापित किए थे।
क्रय केंद्रों से गेहूं को एफसीआई गोदाम में पहुंचाने के लिए ट्रांसपोर्टरों को ठेका दिया गया था, लेकिन ट्रांसपोर्टरों और गेहूं खरीदने वाली एजेंसियों में तालमेल नहीं होने के कारण अधिकतर क्रय केंद्रों पर अनाज खुले में पड़ा है।
शनिवार दोपहर पीसीएफ के अफसरों ने एडीएम वित्त को दी जानकारी के मुताबिक, 10 हजार एमटी गेहूं खुले में पड़ा हुआ था। जिसे गोदामों में पहुंचाना था।
शनिवार शाम आई हल्की बारिश में सिकंदराबाद के एक क्रय केंद्र पर रखा गेहूं भीग गया था। जिसके बाद प्रभारी डीएम जसजीत कौर ने पीसीएफ के अफसरों को गेहूं खुले में न छोड़ने के आदेश दिए थे। रविवार सुबह से ही केंद्रों पर खुले में पड़ा गेहूं उठान का काम शुरू हो गया।
कुछ केंद्रों पर तिरपाल डालने का काम शुरू हो गया। जनपद में सिकंदराबाद, स्याना, औरंगाबाद, शिकारपुर, पहासू, अनूपशहर समेत कई क्रय केंद्रों पर गेहूं खुले में पड़ा हुआ था। जिसे उठाने का काम शुरू किया जा रहा है।