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रामभूल हत्याकांड: कई दिन से चल रही थी साजिश, करीबियों पर भी शक

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बुलंदशहर। सलेमपुर थाना क्षेत्र के गांव भैंसरोली नासिरपुर में सोमवार सुबह हुए रामभूल हत्याकांड की गुत्थी अभी सुलझी नहीं है। पुलिस की प्रारंभिक जांच के आधार पर शक की सूई मृतक के करीबियों और बीते दिनों जेल से छूटकर उनसे संपर्क बढ़ा रहे लोगों पर घूम रही है। रामभूल 70 बीघा जमीन के इकलौते वारिस थे, पुलिस इस तथ्य पर भी जांच कर रही है। संभव है कि 70 बीघा जमीन और भट्टे के करीब 150 गज के प्लाट के लिए हत्या की गई हो। जिस तरह से वारदात की गई है, उससे लगता है कि कई दिन से साजिश रची जा रही थी।पुलिस मामले में जेल से छूटे पांच लोगों समेत 60 लोगों से पूछताछ कर चुकी है। कुछ संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया है।
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भैंसरोली निवासी रामभूल सिंह सोमवार शाम को अपने साथी मनोज व उसके पिता हेमराज के साथ धान बेचकर बुलंदशहर से ट्रैक्टर पर सवार होकर अपने गांव लौट रहे थे। गांव के निकट ही पीछे से बाइक पर सवार होकर आए चार बदमाशों ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। बदमाशों ने चार राउंड फायरिंग की थी। मौके से पुलिस को चार खाली खोखे बरामद हुए हैं। जबकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक की गर्दन व सीने पर तीन गोली लगने की बात सामने आई है। मामले की जांच में एसओजी समेत पांच टीमों को लगाया गया है। शिकारपुर से शिवाली तक व बदमाशों के भागने वाले संभावित मार्गाें पर लगे करीब 150 सीसीटीवी कैमरे पुलिस खंगाल चुकी है। हालांकि, कैमरों में बदमाश बाइकों पर आते हुए नजर आ रहे हैं और शिवाली मार्ग पर भी वारदात के बाद सीसीटीवी में कैद हुए हैं लेकिन अभी तक उनकी शिनाख्त नहीं हो सकी है। वारदात भाड़े के शूटर्स ने की या फिर पूर्व में विभिन्न वारदातों में शामिल रहे आरोपियों ने ही की है, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आ रहा है कि मृतक के करीबी भी वारदात में शामिल हो सकते हैं। मृतक के नाम पर करीब 70-75 बीघा जमीन थी। जबकि, एक अन्य भट्टे पर प्लाट भी बताया जा रहा है। जिसके वह इकलौते वारिस थे। यह जायदाद भी उनकी हत्या का कारण बन सकती है। वहीं, दूसरी ओर जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया उससे स्पष्ट है कि वारदात की साजिश काफी समय से बनाई जा रही थी। सीसीटीवी में भी बदमाश ट्रैक्टर के पीछे चलते नजर आ रहे हैं। यही नहीं, बीते दिनों रामभूल के परिजनों की हत्या में जेल से छूटे आरोपी पिछले कुछ समय से रामभूल के संपर्क में थे। इसी कारण पुलिस की जांच उन आरोपियों की तरफ भी इशारा कर रही है लेकिन अधिकारी अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है कि वारदात किसने की है। वारदात रंजिशन और जमीन की चाह में किए जाने की चर्चा है।
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भतीजे ने अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराई रिपोर्ट
मामले में मृतक के भतीजे संदीप की तहरीर पर पुलिस ने चार अज्ञात बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस ने मृतक के साथ वारदात के वक्त ट्रैक्टर पर मौजूद मनोज व उसके पिता हेमराज से भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया हुआ है। जबकि, उनके अलावा तीन अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मंगलवार शाम को पोस्टमार्टम के बाद रामभूल का शव गांव पहुंचा और पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच अंतिम संस्कार किया गया।

बीते कुछ दिन पूर्व गांव आया था वीर सिंह
मृतक रामभूल का अपने ननिहाल के खानदानी प्रताप व वीर सिंह से विवाद शुरू हुआ था। रामभूल की मां चंपा देवी इकलौती पुत्री थीं। इस कारण ननिहाल की जमीन उनके नाम पर आ गई थी। जबकि, चंपा के अन्य खानदानी इस बात से खुश नहीं थे। साथ ही भट्टे और जमीन को लेकर 35 वर्ष पूर्व खूनी संघर्ष शुरू हुआ था। रामभूल के परिजनों की हत्या के बाद प्रताप और वीर सिंह कुछ समय बाद ही गायब हो गए थे। चर्चा यह भी थी कि उनकी भी हत्या हो चुकी है। लेकिन, सलेमपुर क्षेत्र में चर्चा है कि वीर सिंह उर्फ घोड़ा को कुछ समय पूर्व गांव भैंसरोली के जंगल में ग्रामीणों के साथ देखा गया था। पुलिस भी प्रताप और वीर सिंह के बारे में कुछ पुख्ता तथ्य नहीं जुटा सकी है।

कोट
मामले में पांच टीमों को खुलासे के लिए लगाया गया है। सीसीटीवी फुटेज में बाइक सवार बदमाश नजर आ रहे हैं। जल्द ही वारदात का राजफाश कर दिया जाएगा। - श्लोक कुमार, एसएसपी
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