सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत जानने के लिए शासन के आदेश पर अब गांव गांव जासूस बनाए जाएंगे। जासूसों का रिकॉर्ड और संपर्क सूत्र शासन के पास सुरक्षित रहेगा। जनपद में 55 न्यू पीएचसी, 5 पीएचसी और 13 सीएचसी हैं।
सरकारी अस्पतालों में एक समान रूप से हर एक मरीज को सरकार की एक एक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलना चाहिए, लेकिेन ऐसा कई सरकारी अस्पतालों में होता नहीं है। हालांकि, समीक्षा के दौरान हर एक अस्पताल की परफारमेंस औसत से कही ऊपर दर्शा दी जाती है।
सीएमओ ने बताया कि फर्जी रिपोर्टिंग पर नकेल कसने और स्वास्थ्य सेवाओं को और भी प्रभावी बनाने के मकसद से गांवों में जासूस तैयार किए जाएंगे। एक गांव में दो दो जासूस चिह्नित होंगे। जासूस का नाम, पता, मोबाइल नंबर और गांव का नाम शासन के पास रिकार्ड में सुरक्षित रहेगा।
लखनऊ और दिल्ली बैठे अधिकारी कभी भी फोन घुमाकर जासूस से स्वास्थ्य सेवाओं की हकीकत का पता कर सकते हैं। एक जासूस की फीडबैक दूसरे जासूस से वेरिफाइड कराई जाएगी। जासूस की रिपोर्ट सच मानकर आगे की कार्रवाई अमल में आएगी। जासूसी का आदेश केवल 60 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रो के लिए है। हेल्थपोस्ट आदि पर जासूस से फीडबैक नहीं लिया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग करेगा मदद
विलेज वॉलंटियर को चिह्नित कराने में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मदद करेंगे। वालंटियर बतौर जासूस के रूप में काम करेंगे। इनका मोबाइल नंबर, नाम और पता भी शासन को भेजा जाएगा। जासूस की रिपोर्ट को मान्यता मिलेगी।
सीएमओ की सुनिए
सरकार नए और पुराने 60 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर जासूसों से स्वास्थ्य सेवाओं का फीडबैक लिया जाएगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की आबादी में रहने वाले निष्पक्ष ग्रामीण का नाम शासन को भेजा जाएगा। ग्रामीण को मोबाइल नंबर, नाम पता आदि भी दर्ज कराया जाएगा। शासन के अफसर जासूस से स्वास्थ्य सेवाओं का फीडबैक लेंगे। - डॉ. दीपक ओहरी, सीएमओ, बुलंदशहर