14वें वित्त आयोग की सिफारिशों को जनपद में लागू कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति लिए बगैर ग्राम प्रधानों ने गांवों में विकास कार्य कराए तो ऐसे कार्यों को अवैध घोषित किया जाएगा।
प्रधानों को प्रतिवर्ष सरकारी धन के खर्च का विवरण न्याय पंचायतों में अपलोड कराना होगा। ऐसा नहीं करने
पर 10 प्रतिशत फंड की कटौती की जाएगी।
ग्राम सभाओं में विकास कार्यों की निगरानी बढ़ाने के लिए विकास खंडाें पर एडीओ पंचायत के दफ्तरों को दायरा बढ़ाया जाएगा। एडीओ पंचायत दफ्तर में दो जूनियर इंजीनियर, एक अकाउंट अफसर और एक कंप्यूटर ऑपरेटर भी नियुक्त होंगे।
यदि किसी ग्राम सभा ने एक वर्ष के भीतर उपभोग का विवरण नहीं दिया तो उससे 10 प्रतिशत धनराशि की कटौती होगी। ग्राम सभाओं में खर्च का लेखाजोखा तैयार करने के लिए न्याय पंचायतों के सेटअप तैयार किए जाएंगे।