ग्लोबल वार्मिंग का असर गेहूं और आम की फसलों पर दिखने लगा है। जनवरी अभी बीती नहीं है, आम के बाग बौर से लद गए हैं। गेहूं में भी बालियां आने की शिकायत कृषि वैज्ञानिकों के पास पहुंच रही हैं।
समय से पहले बागों में फूल और बालियों का आना सब ग्लोबल वार्मिंग का असर बताया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों के मुताबिक आम और गेहूं को जो चिलिंग पीरियड मिलना चाहिए था वह 15-20 दिन नहीं मिला।
इसी लिए यह विकार पैदा हो गया। अकसर जनवरी के अंतिम सप्ताह और मार्च के प्रारंभ में आम के बागों में बोर आना शुरू होता है। मार्च में गेहूं की बालियों का निकलना शुरू हो जाता है।
इसबार 10 नवंबर से पहले बोया गए गेहूं की फसल में बालियों का निकलना शुरू हो गया है। कृषि और मौसम वैज्ञानिक विवेक राज के मुताबिक दिसंबर माह जनवरी के प्रथम सप्ताह में तापमान सामान्य से अधिक रहा।
गेहूं और आम के बागों को चिलिंग पीरियड मिलना चाहिए था वह नहीं मिला। गर्मी के कारण आम में बौर आ गया और गेहूं की फसल में बालिया आने लगी।