आबकारी-खाकी के मेल से जहरीली शराब का खेल
बुलंदशहर। सिकंदाराबाद की घटना ने जहरीली शराब के काले कारोबार में तस्करों के साथ पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत की पोल खोल दी है। नशे और जहर के इस खेल की काली कमाई के कारण ही खाकी और आबकारी वालों की जुबां पर ताला लगा रहता है। कार्रवाई तो दूर मौत के इस खेल को अंजाम देने वालों को पुलिस जरूरत पड़ने पर मदद भी करती है। जिले के खादर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध शराब बनाई जाती है और सरकारी नुमाइंदे इक्का-दुक्का लोगों को 10-20 पव्वों के साथ गिरफ्तार कर अपनी पीठ थपथपाती रहते हैं।
देसी शराब की दुकानों पर प्रतिदिन का कोटा निर्धारित होता है, जो उसे गोदाम के माध्यम से सरकार से खरीदना होता है और ठेकेदार को शराब का दिन का पूरा कोटा बेचना होता है। यदि वह कोटा नहीं बेच पाता है तो पेनाल्टी और नुकसान झेलना पड़ता है। इसी नुकसान और पेनाल्टी से बचने के लिए ठेकेदार अपने क्षेत्र के गांवों में दुकान की शराब को अवैध रुप से कुछ ग्रामीणों के माध्यम से कम दामों में बेच देता है। जिससे उसका नुकसान नहीं होता। इस कार्य में पुलिस महकमे को तय राशि पहुंचाई जाती है, जिससे कि ठेकेदार के उस मातहत को पकड़ा न जाए। सरकार ने अवैध शराब के काले कारोबार पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाने और माफिया के खिलाफ गैंगस्टर आदि में कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए थे। लेकिन, दुकानों के आवंटन के साथ इस विभाग में भ्रष्टाचार का धंधा भी शुरू हो गया। नाम न छापने की शर्त पर एक अफसर और कुछ ठेकेदारों ने बताया कि दुकान आवंटित होते ही विभागीय अफसरों के खर्र्र्चे का ब्योरा भी तैयार हो जाता है। प्रत्येक माह प्रत्येक दुकान से पैसा बंधा हुआ होता है। हालांकि, अब इस पूरे प्रकरण में अफसरों ने आंखें मूंद रखी हैं। एक दुकान ठेकेदार ने बताया कि कई बार विभागीय अफसरों से क्षेत्र में अवैध शराब गैर प्रांत और अवैध रुप से बनाई गई शराब की बिक्री की शिकायत की जा चुकी है। लेकिन, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
जनपद में हैं यह दुकानें
जनपद भर में देसी शराब की 227 दुकानें, अंग्रेजी की 118 दुकानें, बीयर की 112 दुकानें विभिन्न लोगों को आवंटित हैं। इसके अलावा जनपदभर में कुल आठ मॉडल शॉप भी संचालित किए जा रहे हैं।
पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कराई जा रही है। आबकारी विभाग या पुलिस महकमा जो भी इसमें दोषी पाया जाएगा, संबंधित के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा।
- रविंद्र कुमार, डीएम
कुलदीप समेत गांव में तीन तस्कर बेच रहे थे ‘जहरीली शराब’
बुलंदशहर। सिकंदराबाद के गांव जीतगढ़ी में एक नहीं तीन तस्कर अवैध रुप से शराब बेचने का कारोबार कर रहे हैं। हालांकि, पुलिस ने एक मुख्य आरोपी कुलदीप को तो गिरफ्तार कर लिया है। लेकिन, दो अन्य आरोपियों का नाम दबी जुबान में ग्रामीण ले रहे हैं। इन्हीं दो आरोपियों में से एक माफिया का भाई भी जहरीली शराब पीने से जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है।
पुलिस ने आरोपी के कुछ रिश्तेदारों व अन्य लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में कुलदीप के अलावा दो अन्य तस्कर भी शराब का कारोबार कर फल फूल रहे हैं और लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। इनमें से एक आरोपी का भाई भी अब जहरीली शराब पीने के बाद जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा है। अन्य आरोपी भी फरार हैं और इसके अलावा एक अन्य आरोपी है जो कि बीते कई वर्षों से जहरीली शराब का कारोबार कर रहा है। इन सभी की वह कई बार शिकायत कर चुके हैं। लेकिन, पुलिस इनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेती है।
समय से पूर्व खुली दुकान, कराई बंद
गांव जीतगढ़ी के निकट गांव मंडावरा पर सरकारी देसी शराब का ठेका है। हादसे के बाद आला अफसर गांव में पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ पुलिसकर्मियों ने समय से पूर्व उक्त दुकान को खुला हुआ देखा और सेल्समैन को डांट डपट कर बंद करा दिया।
डीएम के आदेश पर हुई चेकिंग, सेल्समैन से पूछताछ
हादसे के बाद डीएम ने आबकारी विभाग के अधिकारियों को देसी शराब के ठेकों आदि पर सख्ताई से चेकिंग करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद गांव मंडावरा में चेकिंग के दौरान और जन आक्रोश को देखते हुए दुकान को बंद करा दिया गया। साथ ही सेल्समैन आदि से सख्ती से पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा क्षेत्र की अन्य दुकानों पर भी अभियान चला कर चेकिंग की जा रही है।