िता की मौत के बाद अर्थी को कंधा देने के लिए जेल में बंद तीन बेटों में से एक को शनिवार शाम पेरोल मिल गई। जबकि दूसरे बेटे की पेरोल के लिए डीएम गौतमबुद्धनगर के पास जाना पड़ा है। आखिरकार किशनलाल को बेटे के हाथ से मुखाग्नि मिल सकेगी।
नगर स्थित स्याहू मंदिर के पास रहने वाले लाला किशन लाल सिंघल के तीन पुत्र दीपक, कुशल व कन्हैया हैं। दीपक को लूट के एक मामले आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। वह बरेली जेल में सजा काट रहा है। किशनलाल ने उसे बेदखल कर दिया था।
नगर के चर्चित सूरज सैनी हत्याकांड में कुशल और कन्हैया दोनों भाईयों को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है। कुशल डासना जेल में बंद है, जबकि कन्हैया जिला कारागार बुलंदशहर में बंद है। शुक्रवार दोपहर लाला किशनलाल की मौत हो गई। अर्थी को कंधा और चिता को मुखाग्नि देने के लिए पुत्रों को पेरोल पर बुलाने की मांग हुई। शुक्रवार शाम जिलाधिकारी बुलंदशहर से कुशल व कन्हैया की पैरौल मांगी गई।