जिले के अधिकांश सरकारी चिकित्सालयों में एंटी रैबीज की वैक्सीन काफी समय से नहीं है। जिससे कुत्ता, बिल्ली, बंदर आदि जानवरों के काटने पर लोगों को एआरवी नहीं लग पा रही है। इस पर लोगों को मजबूरी में बाहर से एआरवी खरीद कर लगवानी पड़ रही है। वहीं, जिन चिकित्सालयों में एआरवी मौजूद है वहां पर अधिकांश जगह सिरिंज के नाम पर मरीजों को 10 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
सिरिंज न मिलने पर लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। डिबाई सीएचसी से 15 किमी दूर गांव तलवार निवासी महिला रेखा ने बताया कि रविवार को छह वर्षीय पुत्री को कुत्ते ने काट लिया। सोमवार को सीएचसी पर एआरवी लगवाने के लिए आई तो चिकित्सक ने बाजार से सिरिंज खरीदकर लाने को कहा। बाजार से सिरिंज लाने में देरी होने पर करीब डेढ़ बजे सीएचसी पहुंच गई। चिकित्सक ने डेढ़ बजे अस्पताल बंद होने की बात कह मंगलवार को बुलाया है। चिकित्सक से काफी फरियाद की लेकिन उन्होंने एक नहीं सुनी। मजबूरन वापस लौटना पड़ रहा है।
बाहर से सिरिंज मंगवाने एवं बाद में एआरवी न लगाने के मामले की जांच कराई जाएगी। वेक्सीन के साथ सिरिंज सभी जगह भेजी जाती है। बाहर से सिरिंज मंगवा रहे है तो इस मामले में कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. सुनील कुमार दोहरे, सीएमओ