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पंचायत चुनाव : नए फार्मूले से आधी से ज्यादा सीटों पर बदला आरक्षण

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पंचायत चुनाव : नए फार्मूले से आधी से ज्यादा सीटों पर बदला आरक्षण
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बुलंदशहर। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद पंचायत चुनाव के लिए नए सिरे से आरक्षण की घोषणा हुई। इससे पहले गत दिनों सभी पदों के लिए अनंतिम आरक्षण सूची घोषित कर आपत्तियों ली गई थीं। उनका अंतिम प्रकाशन होने से पहले ही कोर्ट के आदेश पर आरक्षण तैयार करने के लिए नए फार्मूले का पालन किया गया है। यह आरक्षण वर्ष 2015 में तैयार किए गए आरक्षण के आधार और वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार तैयार किया गया है। शनिवार रात को अलग-अलग पदों के लिए जारी हुई आरक्षण सूची नेे दावेदारों के बीच खलबली मचा दी है। सभी पदों पर व्यापक उलटफेर देखने को मिला है।
जनपद में 951 ग्राम प्रधानों का आरक्षण जारी किया गया है, जबकि चुनाव 946 पदों पर लड़ा जाएगा। पांच ग्राम पंचायत गत दिनों गौतमबुद्धनगर में शामिल हो चुकी है, जबकि जिला पंचायत के 52 पदों और ब्लॉक प्रमुख के 16 पदों का भी आरक्षण जारी हो गया है। इसी तरह 1315 क्षेत्र पंचायत सदस्य और 12147 वार्ड सदस्यों के पदों पर भी चुनाव लड़ा जाएगा। जिला पंचायत राज अधिकारी नन्दलाल ने बताया कि जनपद में नए फार्मूले से जारी किए गए आरक्षण में आधे से अधिक सीटों पर बदलाव हुआ है। जिला प्रशासन की ओर से शनिवार को जारी आरक्षण की अनंतिम सूची के बाद अब 23 मार्च तक आपत्तियां और दावे किए जा सकेंगे। आपत्ति व दावे संबंधित ब्लॉक, जिला पंचायत कार्यालय और डीपीआरओ कार्यालय में दर्ज कराए जा सकते हैं। 24 और 25 मार्च को डीएम की अध्यक्षता वाली टीम की ओर से आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा। इसके बाद 26 मार्च को आरक्षण की अनंतिम प्र्रकाशन कर दिया जाएगा।
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322 ग्राम पंचायतों में होगी महिलाओं की सरकार
जनपद में आरक्षण 951 ग्राम पंचायतों का जारी किया गया है। इसके अनुसार 322 गांवों में महिलाओं को प्रधान बनाने के लिए मौका दिया जा रहा है। इनमें अनुसूचित जाति की 73, ओबीसी की 92 और 157 सीट महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं, जबकि अनुसूचित जाति के पुरुषों के लिए 130 और ओबीसी के लिए 164 सीट निर्धारित की गई है। पहले बनाए गए आरक्षण में भी महिलाओं के लिए इतनी ही सीटों पर आरक्षण के अनुसार चुनाव लड़ने का मिला था। इसी तरह 335 सीटें अनारक्षित हैं, जबकि शेष सीट अनुसूचित जाति और ओबीएस के लिए आरक्षित की गई हैं।
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आरक्षण की सूची आते ही गुणा-भाग शुरू
पंचायत चुनाव के आरक्षण की सूची जारी होेते ही जनपद में एक बार चुनावी सरगर्मियां बढ़ गई हैं। 1995 से 2015 के आरक्षण के हिसाब से पूर्व में जारी हुई आरक्षण सूची के अंतिम प्रकाशन पर रोक लगाने के बाद चुनावी मैदान में कूदने वाले जनपद के तमाम दावेदारों की सक्रियता कम हो गई थी। हर किसी को नए सिरे से जारी होने वाली सूची का बेसब्री से इंतजार था। सभी की निगाहें सूची पर टिकी थीं। लोग इस इंतजार में थे कि नए सिरे से जारी होने वाली सूची में उन्हें मौका मिला या नहीं। शनिवार रात को सूची के जारी होते ही ऐसे दावेदारों की सक्रियता एक बार फिर से तेज हो गई है, जिनके मन माफिक सीटें आई हैं। उन्होंने चुनावी समर में कूदने के लिए कमर कस ली है। वोटों को लुभाने और रिझाने का सिलसिला गांवों में तेज हो गया है। लेकिन उन दावेदारों के अरमां सपने बनकर रह गए, जिनकी सीटें मन पसंद नहीं आई हैं। पिछली बार मौका मिलने के बाद चुनावी जंग जीतने को दावेदार इस बार सीट के हाथ से निकलने के बाद परेशान दिख रहे हैं।
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