सरकारी मशीनरी का गंगा किनारे 15 गांवों में खुले में शौच मुक्ति का दावा झूठा निकला। जिन गांवों को शत प्रतिशत संतृप्त करने का दावा किया गया था, उन गांवों में लोग गंगा किनारे खुले में शौच करने जा रहे हैं। नमामि गंगे मिशन की सही मानिटरिंग नहीं होने से गांवोें में रोकटोक को बनी समितियां भी निष्क्रिय हो गई हैं।
जिला पंचायत राज विभाग, बेसिक शिक्षा विभाग और माध्यमिक शिक्षा विभाग के डोर-टू-डोर सर्वे में बसी बांगर, चासी, मुबारकपुर बांगर, हसनपुर बांगर, मौहम्मदपुर बांगर, उदयगढ़ी नगला, अजनारा नगलिया, सुनेहरा, सरायजगन्नाथ, देवली, करोठी, भगवानपुर रुकनपुर, हयातपुर, पूठा मुबारकपुर को खुले में शौच से मुक्त करने का दावा सरकारी मशीनरी ने किया है।
अफसरों के मुताबिक इन गांवों में हर परिवार को शौचालय की सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। मगर हकीकत में अफसरों ने ऐसा किया नहीं है। घर-घर शौचालय नहीं होने से लोगों को शौच के लिए खुले में निकलना पड़ रहा है। इससे न सिर्फ गंगा किनारे प्रदूषण का ग्राफ बढ़ा है, बल्कि सरकार की स्वच्छता संबंधी योजनाओं को भी झटका लगा है।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक रवानी कटीरी में 30 से 40 घरों में शौचालय नहीं है। मुबारकपुर बांगर, हसनपुर बांगर, सुनेहरा, सरायजगन्नाथ, देवली, करोठी, भगवानपुर रुकनपुर, हयातपुर, पूठा मुबारकपुर आदि गांवों को रवीनी कटीरी जैसा ही है। गंगा किनारे बसे गांवों में शौचालयों के निर्माण और जागरूकता अभियान पर सरकार करोड़ों रुपये खर्च कर चुकी है। इसके बावजूद गंगा किनारे बसे गांवों की तस्वीर नहीं बदल रही है।