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अन्नदाता की मौत पर सिस्टम का ‘फाटक’

Tue, 20 Jun 2017 12:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो / बुलंदशहर
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कलेक्ट्रेट पर नाोकझाोक करते प‌िररिजन। - फोटो : अमर उजाला
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कर्ज और भ्रष्टाचार से देशभर में गूंज रही किसानों की सिसकियों का दर्द जिले में भी पहुंच गया। बदहाल अन्नदाताओं के साथ सोमवार को सिस्टम का जो व्यवहार रहा, वह आग में घी का काम कर सकता है। किसानों का हमदर्द होने का दंभ भरने वाली योगी सरकार के अफसरों ने एसी रूम छोड़कर मृतक किसान के परिजनों से मिलना भी गवारा नहीं किया।
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जिले में ऐसा पहली बार हुआ जब किसान की मौत पर सिस्टम का फाटक बंद हो। जिले की मुखिया ने किसानों से मिलना, उनकी बात सुनना तो दूर, कलक्ट्रेट का फाटक तक नहीं खुलने दिया। परिजन गेट पर ही रोते-बिलखते रहे, लेकिन अफसर इस दर्द से संवेदनहीन होकर दफ्तर में ही बैठे रहे।

थक-हारकर बेरहम प्रशासन के द्वार से हारे अन्नदाताओं ने वापस लौटना ही बेहतर समझा। सिस्टम से हारे और भ्रष्टाचार में झुलसे किसान ने रविवार शाम खुदकुशी कर ली थी। सोमवार को परिजन व ग्रामीण किसान के शव को लेकर जिले की मुखिया को आपबीती सुनाने पहुंचे।
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किसान की मौत के पीछे जिम्मेदार अफसरों पर कार्रवाई की मांग के लिए डीएम के सामने अपना दर्द रखना चाहते थे। परिजनों की बात सुनना तो दूर की बात, सिस्टम ने उन्हें कलक्ट्रेट में घुसने तक नहीं दिया। कलक्ट्रेट के गेट से 100 मीटर की दूरी पर अपने दफ्तर में बैठीं जिले की मुखिया को किसान के परिजनों का दर्द सुनने का वक्त नहीं था।

कलक्ट्रेट के बंद गेट पर पुलिस की ऐसी घेराबंदी की गई, जैसे वहां किसानों नहीं, अराजक तत्वों का जमावड़ा हो। कलक्ट्रेट के गेट को बंद रखा गया। जो अंदर था, वह अंदर रहा और जो बाहर था, वह बाहर रहा। हंगामा बढ़ता देख करीब सिटी मजिस्ट्रेट जरूर परिजनों के पास पहुंचे,

लेकिन उन्होंने भी औपचारिकता निभाते हुए परिजनों से शिकायती पत्र लिया और आश्वासन देकर टरका दिया। सिस्टम की इस बेरुखी से हताश परिजन वापस शव को लेकर लौट गए।
परेशान करता था साहूकार ः मृतक किसान की पत्नी बल्लो देवी ने बताया कि छोटे खेत से जैसे-तैसे गुजारा करते थे।

बड़ी तीन बेटियों पूजा, आरती और ज्योति की शादी हो चुकी है। छोटी बेटियां सोनम, दीपाली और कल्लो पढ़ रही है। अफसर को ब्याज पर लेकर रुपया दिया था। अब साहूकार रुपयों के लिए रोजाना बेज्जती करता था।
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