ग्रामीण क्षेत्रों को मिलने वाली बिजली से अब शहरी क्षेत्र रोशन किए जा रहे है। ग्रामीण क्षेत्र में जमकर आपात बिजली कटौती की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र में हो रही इमरजेंसी रोस्टरिंग से ग्रामीणों में आक्रोश है। पिछले कुछ दिनों से बिजली की डिमांड काफी बढ़ गई है, जबकि इसके सापेक्ष आपूर्ति कम हो गई है।
जिले की बिजली डिमांड बृहस्पतिवार को करीब 650 मेगावाट दर्ज की गई, जबकि इसके सापेक्ष आपूर्ति 500 मेगावाट हो सकी। मांग-आपूर्ति का अंतर बढ़ते ही इमरजेंसी रोस्टरिंग तेज कर दी गई है। शहरी क्षेत्रों को तो शेड्यूल के अनुसार आपूर्ति मिल रही है, लेकिन ग्रामीण उपभोक्ताओं को जमकर इमरजेंसी रोस्टरिंग झेलनी पड़ रही है।
ग्रामीण क्षेत्र में 14 घंटे शेड्यूल के सापेक्ष महज 7 से 8 घंटे आपूर्ति की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही जबरदस्त इमरजेंसी रोस्टरिंग से उपभोक्ताओं में आक्रोश है। बता दें कि बारिश नहीं होने के कारण एग्रीकल्चर लोड काफी बढ़ गया है। अभी फसलों को पानी की जरूरत है। ऐसे में लोड बढ़ जाने से डिमांड और आपूर्ति पर फर्क पड़ रहा है।
बुगरासी क्षेत्र को मात्र तीन घंटे आपूर्ति
पिछले एक सप्ताह से कस्बा क्षेत्र के मिल रही मात्र तीन घंटे की आपूर्ति को लेकर क्षेत्रवासियों में रोष है। एक सप्ताह पूर्व कस्बा क्षेत्र को 14 घंटे की आपूर्ति मिल रही थी। पिछले एक सप्ताह से अचानक अघोषित बिजली कटौती शुरू हो गई है।
सईद सैफी, राकेश कुमार, नरेश कुमार, सुभाष गोस्वामी का कहना है कि वर्तमान में बुखार का प्रकोप बढ़ा हुआ है। ऐसे में लोगों को हर समय आपूर्ति दी जानी चाहिए। दिन में काफी गर्मी रहती है।
अस्पतालों में बुखार के मरीजों की खाट लगी हुई है, लेकिन आपूर्ति नहीं आने के कारण उन्हें गर्मी में परेशान होना पड़ रहा है। वहीं, जेई पावर सचिन कुमार ने बताया कि जितनी आपूर्ति मिलती है उतनी ही उपभोक्ताओं को दी जा रही है।