परिषदीय स्कूलों में अब मास्टर जी शिक्षा के साथ बच्चों की सेहत भी सुधारेंगे। उन्हें हर माह बच्चों को आयरन की गाली खिलानी होगी। इतना ही नहीं शिक्षकों को दवाओं का हिसाब-किताब भी रखना होगा। यह काम जुलाई में स्कूल खुलने पर शुरू हो जाएगा।
परिषदीय स्कूलों में बच्चों को निशुल्क शिक्षा, एमडीएम और यूनिफार्म आदि की सुविधा दी जाती है। इसी के साथ बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर आयरन की गोली भी दी जाती है। यह गोली छात्र-छात्राओं को खून की कमी और कुपोषण से बचाने को दी जाती है। मगर, अब इस गोली को खिलाने की जिम्मेदारी गुरुजी की होगी।
इतना ही नहीं शिक्षक दवाओं से होने वाले दुष्प्रभाव से बचने के लिए भी उपाय करेंगे। बच्चों को दी जाने वाली दवा का हिसाब-किताब भी रखना होगा। इसके लिए रजिस्टर भी दिए जाएंगे। सीडीओ जसजीत कौर ने बताया कि यह काम यूनिसेफ और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से शुरू किया गया है।
सरकार ने यूनीसेफ के सहयोग से सप्ताहिक आयरन और फॉलिक एसिड संपूर्ण कार्यक्रम शुरू किया है। इसके तहत परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों को स्कूल में छात्र-छात्राआें को आयरन और फॉलिक एसिड टेबलेट समेत विटामिन की अन्य दवाएं खिलानी होगी। इन दवाओं से बच्चों में खून की कमी से होने वाली बीमारियों में कमी आएगी।
इस पहल से बच्चों को एनीमिया और कुपोषण जैसी बीमारियों से बचाया जा सकेगा। शिक्षकों को दवाएं खिलाने और उसके फायदे-नुकसान के संबंध में जानकारी के लिए एक पुस्तिका भी दी जाएगी।