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अब महिला समूह भी जनपद में बढ़ाएगी गन्ने की मिठास

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अब महिला समूह भी बढ़ाएंगी जनपद में गन्ने की मिठास
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बुलंदशहर। खेती को उन्नत बनाने के साथ ही गन्ने की मिठास बढ़ाने में अब जनपद की महिला समूह भी अहम भूमिका निभाने जा रही हैं। अब गन्ने की खेती का परंपरागत तरीका भी बदल जाएगा। अब पौधशालाओं में बड चिप विधि से गन्ने की फसल तैयार की जाएगी। इसके बाद किसान इन्हीं पौधों की अपने खेत में धान की तरह रोपाई करेंगे। इस विधि से गन्ने की पौध तैयार करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत नौ महिला समूहों का चुना गया है।
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गन्ना विकास विभाग के आयुक्त संजय आर भूसरेड्डी ने ‘करके सीखो पद्धति’ के आधार पर महिला रोजगार सृजन योजना के तहत ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के निर्देश जारी किए हैं। जनपद में प्रत्येक वर्ष 64 हजार हेक्टेयर भूमि में गन्ने की पैदावार होती है। इस खेती से 1.12 लाख किसान जुड़े हुए हैं। स्वयं सहायता समूह की महिला उद्यमियों को गन्ने की पौध तैयार करने के लिए पहले प्रशिक्षण दिया जाएगा। महिलाआं को बीज चयन, हस्तचलित मशीन से एकल आंख के टुकड़े काटना, ट्रे में अंकुरण, उगाने का समय, रोपण की विधि के बारे में जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं सिडलिंग विधि से गन्ने की पौध तैयार कर उनकी बिक्री करके आय प्राप्त कर सकेंगी। जिला गन्ना अधिकारी डीके सैनी ने बताया कि राज्य सरकार महिला समूहों को 3.50 रुपये प्रति पौध की दर से अनुदान देगी, जिससे समूह की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। इस विधि से तैयार गन्ने की पौध रोग रहित होगी और उत्पादन अच्छा होगा। किसानों को दो माह का अंतराल भी मिलेगा। वह इस दौरान कोई अन्य फसल प्राप्त करके आय बढ़ा सकते हैं। इस विधि से गन्ने की फसल का रकबा भी बढ़ने की संभावना है। फिलहाल इसके लिए जनपद के नौ महिला समूहों का चयन किया गया है।
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