मीट कारोबार को वैध करने की मंशा से नगर पालिकाए अपने बूचड़खानों में इटीपी लगाएगी। डीएम ने सभी निकाय अफसरों को कार्य योजना बनाने का आदेश दे दिया है।
जनपद में 17 नगर पालिका और नगर पंचायतें हैं। छह नगर पालिकाओं के अपने अपने इलाकों में बूचड़खाने हैं। बाकी नगर पालिकाआें के पास बूचड़खाने नहीं है।
जिन नगर पालिकाओें के पास बूचड़खाने हैं, उनमें इटीपी नहीं है। इसलिए छह स्लाटर हाउस बंद पड़े हुए हैं। हालांकि बूचड़खानों का लाइसेंस नगर पालिका प्रशासन के पास जरुर है। अवैध कटान बंद होने के बाद व्यापारी पशुओं का कटान वैध रुप से करें, इसके लिए डीएम ने सभी नगर पालिका अधिकारियों को बूचड़खानों में इटीपी लगाने के लिए कार्य योजना बनाने का आदेश दे दिया है।
कार्य योजना नगर निकाय वार शासन के पास भेजी जाएगी। धनराशि रिलीज होने के बाद इटीपी पर काम शुरू होगा। इटीपी लगने से पशु अवशेषों का निस्तारण वैज्ञानिक ढंग से होगा। डीएम आंजनेय कुमार सिंह कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप कार्य योजना बनाने के लिए कह दिया गया है।
महंगा है इसलिए नहीं लगा इटीपी
डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि नगर पालिका इओ से इटीपी के विषय में पूछा गया है। अधिशासी अधिकारियों ने बताया है कि इटीपी की कास्ट करोड़ों रुपये आती है। पालिकाओं के पास इटीपी लगाने के लिए संसाधन नहीं थे। डीएम ने पूछा कि आपने कोई कार्य योजना बनाकर शासन को भेजी तो पालिका अधिकारियों ने इंकार कर दिया। डीएम ने छह नगर पालिका इओ को नोटिस जारी कर दिया है।
महंगा है इसलिए नहीं लगा इटीपी
डीएम आंजनेय कुमार सिंह ने बताया कि नगर पालिका इओ से इटीपी के विषय में पूछा गया है। अधिशासी अधिकारियों ने बताया है कि इटीपी की कास्ट करोड़ों रुपये आती है। पालिकाओं के पास इटीपी लगाने के लिए संसाधन नहीं थे। डीएम ने पूछा कि आपने कोई कार्य योजना बनाकर शासन को भेजी तो पालिका अधिकारियों ने इंकार कर दिया। डीएम ने छह नगर पालिका इओ को नोटिस जारी कर दिया है।
कोई नियम नहीं
सिकंदराबाद, खुर्जा, अनूपशहर, स्याना, डिबाई और शिकारपुर नगर पालिका के अपने बूचड़खाने हैं। तीस साल से वजूद में आने के बाद बूचड़खानों में इटीपी नहीं हैं। इसके बावजूद बूचड़खानों में पशुओं का कटान होता रहा। पालिका प्रशासन हर साल बूचड़खानों का ठेका छोड़ती है। यह ठेकेदार के ऊपर निर्भर होता है कि स्लाटर हाउस में कितने पशुओं का कटान कराए। नगर पालिका शुल्क वसूलकर ठेका जारी कर लाखों रुपये कमाती रहीं।