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Bulandshahar News: अब कताई मिल की 68 एकड़ जमीन पर उद्योग लगाने की तैयारी

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सहकारीनगर ​स्थित कताई मिल
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बुलंदशहर। अब कताई मिल की 68 एकड़ जमीन पर इंडस्ट्री लगाने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए उद्योग विभाग के अधिकारियों ने प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा है। शासन से स्वीकृति के बाद जमीन के हस्तांतरण की कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 1985 के दौरान अरबों रुपयों का कोराबार करने वाला कताई मिल पिछले 30 वर्षों से बंद पड़ी है।
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वर्ष 1963-67 के बीच सहकारिता मंत्री रहे बाबू बनारसीदास के प्रयास से अनूपशहर रोड स्थित सहकारी नगर के पास कताई मिल का निर्माण कराया गया था। वर्ष 1985 में पहली बार कताई मिल से उत्पादन शुरू किया गया था। करीब 30 साल पहले इस मिल के संचालन को बंद कर दिया गया और मिल में रखी मशीनरी पूरी तरह से गल चुकी हैं। स्थिति यह है कि पिछले 30 सालों से करोड़ों रुपये की मशीनरी गल रही है, लेकिन शासन-प्रशासन इसके समाधान के लिए कोई ध्यान नहीं दे रहा। अब कताई मिल की 68 एकड़ जमीन को इंडस्ट्री लगाने के लिए प्रयोग किया जाएगा। इन्वेस्टर्स समिट के दौरान हुए एमओयू के आधार पर निवेशकों को अपेक्षित जमीन न मिलने पर अधिकारियों ने इस जमीन के प्रयोग की योजना तैयार की है। उद्योग विभाग के अधिकारियों ने जमीन को विभाग के नाम हस्तांतरित करने के लिए शासन से सहमति मांगी है। बताया जा रहा है कि शासन की ओर से इस संबंद में सकारात्मक संकेत दिए हैं, जिसके बाद ही अधिकारियों ने इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर भेजा है।



1985 में 16.39 लाख किलो हुआ था धागे का उत्पादन

कताई मिल पर सोध करने वाले प्रोफेसर ओपी सिहं ने बताया कि वर्ष 1985 में कताई मिल में रिकॉर्ड 1639472 किग्रा धागे का उत्पादन किया गया था। इस दौरान मिल को कुल 10 करोड़ 67 लाख 84 हजार 490 रुपये का लाभ हुआ था। मिल संचालन का उद्देश्य था कि इससे जिले के लोगों को रोजगार मिले और प्रदेश व अन्य राज्यों में धागे की कमी को दूर किया जाए। क्षेत्र में कपास के उत्पादन में गिरावट और मिल संचालन के लिए सरकार की ओर से बेरुखी के चलते मिल का संचालन करीब तीन दशक से बंद चल रहा है।
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इन्वेस्टर्स समिट में 499 उद्यमियों ने किया था 76 हजार करोड़ का एमओयू

फरवरी 2023 में आयोजित हुए इन्वेस्टर्स समिट के दौरान जिले में 499 निवेशकों ने 76 हजार करोड़ रुपये के निवेश के लिए एमओयू किया था। इसके बाद अपेक्षित और सस्ती दर पर जमीन न मिलने के कारण 40 हजार करोड़ निवेश करने वाले वेल्सपन ग्रुप की ओर से निवेश करने से हाथ पीछे खींच लिए। जबकि रिलायंस और आईओसी समेत अन्य बड़ी कंपनियों को भी निवेश को जमीन पर उतारने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिल पाई।



कताई मिल की जमीन को इंडस्ट्री लगाने के लिए प्रयोग किया जाएगा। इसके लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा है। यदि शासन की ओर से सहमति दी जाती है तो निवेशकों को जमीन उपलब्ध कराई जाएगी। - एके सिंह, उपायुक्त, उद्योग विभाग
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