फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बुलंदशहर से जुड़ा है निदा फाजली का नाता

Tue, 09 Feb 2016 11:43 PM IST
अमर उजाला, बुलंदशहर
विज्ञापन
विज्ञापन
‘कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं जमीं तो कही आसमां नहीं मिलता’। मशहूर शायर और गीतकार निदा फाजली की ये लाइनें प्रत्येक व्यक्ति कभी न कभी जरूर महसूस करता है।
विज्ञापन


डिबाई के मोहल्ला शेखान में जन्मे निदा फाजली के निधन से पूरे देश के साथ मोहल्ले वालों की आंखें भी नम है। निदा के जन्म के बाद उनके पिता डिबाई से सपरिवार ग्वालियर चले गए थे।

निदा फाजली का जन्म डिबाई के मोहल्ला शेखान में हुआ था। कस्बा निवासी 70 वर्षीय शायर डा. मोहम्मद हसनैन जाफरी बताते हैं कि निदा फाजली बचपन में ही अपने पिता मुर्तजा हुसैन और मां जमील फातमा के साथ ग्वालियर चले गए थे।
विज्ञापन


उसके बाद फाजली कभी डिबाई नहीं आए। डॉ. जाफरी ने बताया कि उनके बुजुर्ग बताते थे कि निदा फाजली के पिता 1950 में अपना मकान वक्फ बोर्ड को दे गए थे। जिसमें कई साल तक एक स्कूल संचालित होता रहा।

स्कूल संचालिकाके इंतकाल के बाद उनका परिवार मकान बेचकर कहीं चला गया। अब जिस मकान को मोहल्ले के लोग निदा फाजली का बताते हैं वहां दूध की डेयरी चलती है।

डेयरी संचालक रहीस खान ने बताया कि वह निदा फाजली को नहीं जानते। उन्होंने कई साल पहले यह जगह खरीदकर बैनामा कराया था। वहीं, निदा फाजली के इंतकाल की खबर से मोहल्ले वालों की आंखें नम हैं।

एनआरईसी कालेज खुर्जा के इतिहास विभाग के अध्यक्ष डॉ. लारी आजाद ने भी अपनी एक किताब में निदा फाजली के डिबाई से ताल्लुक होने का जिक्र किया है।

लारी आजाद ने बताया कि उनकी फाजली साहब से अक्सर फोन पर बात होती रहती थी। अब भी फेसबुक से ताल्लुक में रहते थे। मेरी निजामत (संचालन) में दो मुशायरे भी निजा फाजली ने पढ़े।
विज्ञापन


उनके डिबाई को लेकर कई बार चर्चा हुई, लेकिन उनको याद नहीं रहा कि वह कब डिबाई से चले गए।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें