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Bulandshahar News: अंबर पर वही उड़ेंगे...जिनके अपने पर होंगे

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जिला प्रदर्शनी के रविंद्र नाट्यशाला में कलाम पेश करती सबा बलरामपुरी। संवाद
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बुलंदशहर। जिला कृषि औद्योगिक एवं सांस्कृतिक प्रदर्शनी कीे रविंद्र नाट्यशाला में बुधवार रात को कुल हिंद मुशायरे का आयोजन हुआ। इसमें दूर-दराज के शायरों ने शायरी पेश की। मुजफ्फरनगर के खुर्शीद हैदर ने गैर परों पर उड़ सकते हैं हद से हद दीवारों तक, अंबर पर तो वही उड़ेंगे, जिनके अपने पर होंगे कलाम सुनाया तो पंडाल तालियों की गड़गडाहट से गूंज उठा। साथ ही शायरों ने अपनी प्रस्तुति से एकता का संदेश दिया। कार्यक्रम में आधी रात तक श्रोता जमे रहे।
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जिला प्रदर्शनी के ओपन स्टेज पर आयोजित मुशायरे का मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश सरकार के राज्य मंत्री दानिश आज़ाद अंसारी, विशिष्ट अतिथि भाजपा जिलाध्यक्ष विकास चौहान, एडीजे निशांत चौधरी, प्रदर्शनी समिति के उपाध्यक्ष ठाकुर सुनील सिंह व कार्यक्रम संयोजक नदीम अख्तर ने महफिल से पूर्व शमा को रोशन कर शुभारंभ किया। शायर ख़ुर्शीद हैदर ने खुदा की शान में नात एवं मुमताज़ नसीम ने कौमी तराना सुना कार्यक्रम की शुरुआत की।
डॉ. नवाज़ देवबंदी ने मेरे लहजे से रोशनी फूटी, चिराग ज़ेहन के अन्दर जला रहा था मैं, मैं बादशाह नहीं था फ़क़ीर था लेकिन ग़रीब लोगों के बच्चे पढ़ा रहा था मैं.., मुशायरे के नाजिम व शायर नदीम फरुख ने धड़कन पर भरोसा है ना सांसों पर यकीन है, सर पर है फलक इसलिए पैरों में ज़मीं है..,
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मुंबई से अंतराष्ट्रीय शायर महशर अफ़रीदी ने लहजे में शायरी के, ग़ज़ल की ज़बान में, तुम ने तो इश्क़ घोल दिया मेरे कान में.., अंतराष्ट्रीय शायर अल्ताफ़ ज़िया ने जला है कौन बुझा क्या मुझे नही मालूम, चिराग़ क्या है हवा क्या मुझे नहीं मालूम.., चंडीगढ़ से अंतरराष्ट्रीय युवा शायर वरुण आनंद ने खेल बड़ा मुश्किल था लेकिन आसानी से जीत गए, चालाकी से वो हारा हम नादानी से जीत गए.., अंतराष्ट्रीय शायरा मुमताज़ नसीम ने मेरी ग़ज़ल जो उसको अपने नाम से सुनाई है, मेरी निगाह में हुज़ूर ये भी बेवफ़ाई है.., हास्य शायर कलीम समर ने शेर सुन कर लिपट गईं बेगम, कितनी मीठी ज़बान है उर्दू.., शायरा सबा बलरामपुरी ने वही आज कह रहा है कि दुआ में याद रखना, जो ये कह रहा था कल तक कि कोई खुदा नहीं है.., मध्यप्रदेश से शायरा ख़ुशबू श्रीवास्तव ने किसी से मदद मांगू ये हरगिज़ हो नहीं सकता, सहारो में ख़ुदा तेरा सहारा चाहिए मुझको.., अज़्म शाकिरी ने आ मेरी मौत मेरी जान बचा ले आकर, ज़िंदगी रोज़ मुझे जेरो जब़र करती है.., सुनाकर दर्शकों का आकर्षण अपनी ओर खींचा।
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