उद्यमी बोले...बनें ऐसी नीतियां जिनसे हर वर्ग को मिले लाभ
एमएसएमई फॉर भारत कॉन्क्लेव में बुलंदशहर के उद्यमियों ने छोटे-बडे़ उद्यमियों के लिए उनके वर्ग के हिसाब से नीतियां बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कुछ नीतियां एक वर्ग के लिए आसान तो दूसरे वर्ग के उद्यमियों के लिए कठिन हैं। उन्होंने अवस्थापना सुविधाओं से जुड़ीं क्षेत्रीय समस्याओं का निराकरण कराए जाने की मांग भी उठाई। साथ ही विभिन्न विभागों के स्तर से होने वालीं अड़चनों पर बात की। यही नहीं उद्यमियों ने एमएसएमई के भविष्य को भी उज्ज्वल बताया।
सूक्ष्म और लघु के लिए हो अलग योजना
सिकंदराबाद इंडस्ट्रीज वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष संदीप अग्रवाल ने कहा कि एमएसएमई में सूक्ष्म, लघु और मध्यम वर्ग के उद्योग में भिन्नता है। इसलिए लघु व सूक्ष्म वर्ग को मध्यम वर्ग के साथ समान रूप से न देखा जाए। सरकार को लघु व सूक्ष्म उद्योगों के लिए अलग-अलग मानक तैयार करने होंगे। अभी एनओसी लेने के साथ ही अन्य मानक एक करोड़ से 200 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले सभी उद्यमियों के लिए एक जैसे हैं। भविष्य में अलग-अलग मानक बनें तो एमएसएमई सेक्टर को लाभ मिलेगा।
650 उद्योग लेकिन यूपीसीडा का ऑफिस नहीं
सिकंदराबाद इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के सचिव बृजमोहन पांडेय ने कहा कि जिले में सिकंदराबाद औद्योगिक क्षेत्र महत्वपूर्ण उद्योग खंड है। यहां पर 650 से ज्यादा इकाइयां हैं। इसके बावजूद यूपीसीडा का कोई भी कार्यालय नहीं है। समस्याओं के समाधान के लिए उद्यमियों को गाैतमबुद्धनगर के कासना तक जाना पड़ता है। प्राधिकरण को इसके लिए अपने छोटे-छोटे कार्यालय सभी औद्योगिक क्षेत्रों में खोलने चाहिए। इसके अलावा सिकंदराबाद का भूजल स्तर भी रेड जोन में आ गया है। इसको लेकर भी कुछ करने की जरूरत है। कई छोटे उद्यमियों को पांच साल बाद नोटिस मिलते हैं। ऐसी स्थिति में जीएसटी विभाग को उन्हें जागरूक करना चाहिए। एमएसएमई में भविष्य तभी संवरेगा जब ज्यादा से ज्यादा लोग जागरूक होंगे।
प्रशिक्षित मानव संसाधन की जरूरत
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के मंडल चेयरमैन नितिन जैन ने कहा कि उद्योगों में बेहतर तकनीक और आधुनिक मशीनों को चालू करने के लिए बहुत सारी प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ती हैं। इस पर सरकार को विचार करना चाहिए। प्रशिक्षित मानव संसाधन की भी जरूरत है। जीएसटी विभाग की ओर से हाल ही में नई दरों की घोषणा की गई, जिसमें कच्चे माल पर अभी 18 प्रतिशत कर है और तैयार उत्पाद पर केवल 5 प्रतिशत ही कर है। इसको लेकर उद्यमी चिंतित हैं। इसके अलावा यदि कोई एक विभाग ऋण की अनुमति देता है तो दूसरा विभाग उस जमीन पर आसानी से निवेश नहीं होने देता है। इस दिक्कत का भी समाधान होना चाहिए।
पॉटरी उद्यम क्षेत्र में कूड़ा निस्तारण केंद्र की जरूरत
खुर्जा पॉटरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के संरक्षक राजीव बंसल ने कहा कि खुर्जा में दो अलग-अलग औद्योगिक क्षेत्र हैं। इनमें जंक्शन मार्ग और जीटी मार्ग शामिल हैं। जंक्शन मार्ग पर जल निकासी की सबसे बड़ी समस्या है। मुख्य मार्ग पर नाला नहीं है। इससे औद्योगिक क्षेत्र में जलभराव की समस्या रहती है। इसके अलावा लोगों को जोड़ने के लिए कनेक्टिविटी नहीं है। लोग जंक्शन औद्योगिक क्षेत्र की ओर जा नहीं पाते। एनएच 34 और जेवर रोड को जोड़ने वाला बाईपास बनने से राहत मिल सकती है। वहीं कूड़ा निस्तारण केंद्र नहीं होने से यहां काफी गंदगी रहती है। उसका बनना जरूरी है।
जल निकासी बड़ी समस्या
चोला इंडस्टि्रयल एंड ट्रेड्स एसोसिएशन के महामंत्री विजयपाल सिंह ने कहा कि उनके यहां की मुख्य समस्याएं नाली और सड़क की हैं। क्षेत्र में पानी की निकासी नहीं होने से जलभराव की स्थिति बनी रहती है। बरसात के मौसम में यहां से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा पुलिस विभाग से मांग उठाई कि यदि किसी उद्यमी के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो पहले उचित जांच की जाए। जांच के बाद ही मुकदमा दर्ज हो क्योंकि एक उद्यमी से एक उद्योग और हजारों लोगों का रोजगार जुड़ा होता है।
ओवरलोडिंग से होते हैं फॉल्ट
रामा डेयरी के संचालक सुनील रामा ने कहा कि एक औद्योगिक क्षेत्र से लाखों परिवार जुड़े रहते हैं। दूध का कारोबार वर्तमान में मुख्य रूप से खुर्जा और स्याना रोड पर है। वहां की सड़कें काफी खराब हैं। वाहनों का निकलना भी मुश्किल होता है। जिम्मेदार विभागों को सड़क निर्माण पर ध्यान देना चाहिए। वहीं खुर्जा स्थित धरपा विद्युत उपकेंद्र में ओवरलोडिंग के कारण आए दिन फॉल्ट रहता है। इससे औद्योगिक क्षेत्र में काफी समस्या होती है और उत्पादन प्रभावित होता है।