खुर्जा में अहोई माता का पूजन कर पाठ करती महिलाएं। संवाद
बुलंदशहर/बुगरासी। अहोई अष्टमी का व्रत सोमवार को श्रद्धा एवं भक्ति भाव से मनाया गया। माताओं ने अपने पुत्रों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि और मंगलमय जीवन की कामना करते हुए निर्जल उपवास रखा। सुबह स्नान-पूजन के बाद अहोई माता की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीप जलाकर पूजन किया।
शाम के समय तारों के दर्शन के बाद कथा सुनाई गई और माताओं ने अहोई माता से संतान की रक्षा और दीर्घायु का आशीर्वाद मांगा। पूजन स्थल पर सिंगाड़े, मूली, गन्ना आदि रख पूजन किया गया। पं. कैलाश शर्मा के अनुसार मान्यता है कि अहोई माता की पूजा में गन्ना अर्पित करने से परिवार में मीठा संबंध, सुख और संपन्नता बनी रहती है। सिंघाड़े को शीतलता और संतुलन का प्रतीक माना जाता है। यह फल पानी में पैदा होता है, इसलिए इसे शुद्धता और स्थिरता का द्योतक समझा गया है।
पूजा में सिंघाड़े रखने से संतान का स्वास्थ्य अच्छा रहता है और जीवन में स्थिरता आती है। साथ ही मूली को पवित्रता और सादगी का प्रतीक माना जाता है। पुराणों के अनुसार अहोई माता को मूली बहुत प्रिय है। मूली भूमि से जुड़ी मेहनत और धैर्य का प्रतीक है, इसलिए पूजा में इसे अर्पित करने से परिवार में धैर्य, संयम और स्थायित्व बना रहता है।