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'पुलिस की पिटाई से हुआ ये हाल': मां तक को नहीं पहचान पा रहा शीलेंद्र, केवल चिल्ला रहा नहीं-नहीं; झटक रहा गर्दन

Mon, 22 Dec 2025 09:02 PM IST
विकास कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, खुर्जा

सार

भाई अनिल ने बताया कि शीलेंद्र केवल नहीं-नहीं चिल्ला रहा और अपने हाथ पैर झटक रहा है। किसी की तरफ न ही देख रहा और न ही बात कर रहा है। उसकी यह हालत देख परिजन काफी चिंतित हैं।
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शीलेंद्र अस्पताल में भर्ती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के बुलंदशहर जेल में पिस्टल चोरी के आरोप में बंद युवक की मानसिक हालत इतनी बिगड़ गई कि वह अपने परिजनों को भी नहीं पहचान रहा। गंभीर अवस्था में मेरठ मेडिकल में भर्ती है। परिजनों ने शिकारपुर थाना पुलिस पर पिटाई करने और जेल प्रशासन पर बीमारी की सूचना नहीं देने का आरोप लगाया। 

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खुर्जा की प्रीत विहार कॉलोनी निवासी अनिल राघव ने बताया कि शिकारपुर थाना में राधा कृष्ण मोहल्ला निवासी विशाल कौशिक ने अपनी पिस्टल चोरी में अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई। सात दिसंबर को शिकारपुर थाना क्षेत्र के तीन उपनिरीक्षक मामले में अनिल के छोटे भाई शीलेंद्र राघव को पकड़ने आए और गिरफ्तार कर ले गए। 

इसके अगले दिन शिकारपुर थाना की पुलिस अनिल के बड़े भाई सुनील राघव को भी गिरफ्तार कर ले गई। आरोप है कि इस दौरान पुलिस ने शीलेंद्र की थाना में बेरहमी से पिटाई की उसका अपराध कबूल करवाया। इसके बाद पुलिस ने दोनों भाइयों को जेल भेज दिया। 

20 दिसंबर को जब अनिल, उनके ममेरे भाई बिजेंद्र और मां जिला बुलंदशहर कारागार में शीलेंद्र और सुनील से मिलाई करने गए। वहां जाकर पता चला कि शीलेंद्र की तीन दिन पहले तबीयत बिगड़ गई थी और वह मेरठ मेडिकल में भर्ती है। 

यह सूचना मिलने पर परिजन मेरठ मेडिकल में पहुंचे तो देखा कि शीलेंद्र सामान्य वार्ड में भर्ती था और अजीबों गरीब हरकत कर रहा था। निगरानी पर मौजूद पुलिस कर्मियों से गुहार लगाने के बाद परिजन शीलेंद्र से मिलने पहुंचे। इसके बाद परिजनों ने बात करने का प्रयास किया तो और शीलेंद्र पहचान ही नहीं पाया। न ही परिजनों से कोई बात कर रहा और न ही उनके सवालों का जवाब दे रहा। 

पुलिस की पिटाई से खो दिया मानसिक संतुलन
भाई अनिल ने बताया कि शीलेंद्र केवल नहीं-नहीं चिल्ला रहा और अपने हाथ पैर झटक रहा है। किसी की तरफ न ही देख रहा और न ही बात कर रहा है। उसकी यह हालत देख परिजन काफी चिंतित हैं। उनका कहना है कि पुलिस की पिटाई से और उसके डर से शीलेंद्र मानसिक संतुलन खो रहा है। आरोप है कि पुलिस ने उसको बेरहमी से पीटा। तबीयत बिगड़ने के बावजूद जेल प्रशासन ने भी परिजनों को कोई सूचना नहीं दी। 

जेल से जब किसी कैदी को बीमार होने पर अस्पताल भेजा जाता है तो उसके परिजनों को फोन कर जरूर अवगत कराया जाता है। साथ ही पुलिस लाइन में पत्र भेजा जाता है। परिजनों को सूचना नहीं देने का आरोप निराधार है। - कृष्णा वर्मा, डिप्टी जेलर
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साक्ष्य के आधार पर आरोपी शीलेंद्र को गिरफ्तार किया और उसने अपराध कबूल कर लिया। इसमें पुलिस को कोई दबाव बनाने की आवश्यकता नहीं थी। आरोपी को दस-12 दिन पहले जेल भेजा गया था और तबीयत तीन दिन पहले बिगड़ी है। पुलिस हिरासत में युवक स्वस्थ था। - डॉ. तेजवीर सिंह, एसपी देहात
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