तेज आंधी ने बागों में बरपाया कहर, कच्चे आम गिरे
बुलंदशहर/बुगरासी/स्याना/ऊंचागांव। जनपद में शुक्रवार देर रात आई तेज आंधी से आम उत्पादकों को काफी नुकसान पहुंचा है। आंधी के कारण पेड़ों से आम के कच्चे फल गिर गए, जिससे आम उत्पादकों को भारी क्षति हुई है। आंधी, लॉकडाउन व कोरोना कर्फ्यू के कारण आम उत्पादकों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
गुलावठी क्षेत्र के आम उत्पादक बागान किसानों का कहना है कि एक माह में तीन बार तेज आंधी आ चुकी है। इस बार आई तेज आंधी से करीब 60 प्रतिशत कच्चे आम डालियों से झड़ गईं। आंधी के कारण आम के बागों में कुछ पेड़ की डालियां भी टूट गई। आम उत्पादकों का कहना है कि मंडी में कच्चे आम की कीमत काफ ी कम है। आम में जाली भी नहीं पड़ी है, जिससे उनकी पाल लगाई जा सके। बागवानों का कहना है कि करीब 10-15 दिन में आम पकने शुरू होते, इससे पूर्व ही आंधी से काफी नुकसान हुआ है। वहीं, स्याना, बुगरासी, ऊचांगांव और चोला क्षेत्र में भी आंधी ने बागवानों को भारी क्षति पहुंचाई है। मंगलवार की प्रात: पेड़ों के नीचे कच्चे आम पड़े हुए थे तथा बागवानों ने आम को इकट्ठा करने के लिए मजदूर लगा दिए। आम उत्पादकों का कहना है कि कच्चे आम की मंडी में कीमत काफ ी कम है।
बोले बागवान
अपने परिवार का पालन पोषण करने के लिए दिन व रात मैं बाग की रखवाली कर रहा हूं। रात्रि में तेज आधी के कारण पेड़ों से आधे से अधिक कच्चे आम झड़ गए। एक माह में तीन बार आंधी आ चुकी है। जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ है। सरकार को बागवानों की आर्थिक मदद करनी चाहिए। - नरेंद्र सैनी।
आंधी से पेड़ों से आधे से अधिक कच्चे आम झड़ गए हैं। पिछले वर्ष लॉकडाउन के चलते उन्हें भारी नुकसान हुआ था तथा अब कोरोना कर्फ्यू लगा हुआ है। आंधी व कोरोना कर्फ्यू के कारण बागवानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही। आम उत्पादकों का साल भर का सहारा आम की फसल ही है। - असलम मुकद्दम।
कस्बा क्षेत्र फलपट्टी क्षेत्र है लेकिन सुविधा कुछ भी नहीं दी गई है। पैकेजिंग हाउस तक की सुविधा बागवानों को नहीं मिली है। रात की आंधी से लगभग 60 प्रतिशत तक आम गिरा है। अभी इस आम को पकाया नहीं जा सकता जिसके कारण गिरे हुए आम का मूल्य बहुत कम मिलेगा। - अफाकुर्रहीम खान।
आंधी से भारी मात्रा में गिरे आम को केवल अचार और खटाई में ही प्रयोग किया जा सकता है। आम में अभी जाली नहीं पड़ी है। इस समय के गिरे आम की कीमत जाली पड़े आम की तुलना में चौथाई ही होती है। एक माह के भीतर तीसरी बार आंधी आई है जिससे बागवानों को भारी नुकसान है। - दीपक त्यागी