भारतीय स्टेट बैंक के एटीएम के बाहर पैसा निकालने के लिए लगी कतार।
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नोटबंदी से यदि कोई सबसे ज्यादा परेशान है तो वह किसान मजदूर और व्यापारी है। आलम यह है कि 28 दिन के भीतर जनपद में फुटकर बाजार को 1000 करोड़ से अधिक की चपत लग चुकी है। दरअसल लोग प्लास्टिक मनी के चलन के लिए तैयार नहीं है।
बता दें कि जनपद में आठ लाख ग्राहकों के पास डेबिट कार्ड- क्रेटिड कार्ड हैं। इनमें से आधे लोग प्लास्टिक कार्ड का इस्तेमाल नहीं करते हैं। दुकानों पर स्वैप मशीनों का जबरदस्त टोटा है। ऐसे मेें कारोबार बढ़े तो कैसे।
बाजार में इक्का दुक्का बड़े दुकानदार और शोरूम मालिक ही स्वैप की सुविधा आम आदमी को उपलब्ध करा पा रहे हैं। कुल मिलाकर 95 फीसदी दुकानदारों के पास स्वैप मशीनें नहीं है। हालांकि हाल ही के दिनों में लीड बैंक अफसर ने स्वैप मशीन उपलब्ध कराने के कुछ इंतजाम जरूर किए हैं।
यहीं कारण है कि बाजार में मायूसी है। मिठाई से लेकर रेडीमेंड गारमेंटस, बैंगल स्टोर, टॉय शॉप, होटल, रेस्तरा आदि पर ग्राहकों का टोटा बना हुआ है। नोटबंदी के कारण मैरिज कारोबार पर भी नोटबंदी का ग्रहण लग गया है।
चूड़ी बाजार, रेडीमेड्स गारमेंटस उद्योग, ज्वैलरी उद्योग, फूड्स कारोबार, होटल व्यापार, सौंदर्य प्रसाधन कारोबार, खिलौना कारोबार बंदी जैसे हालात से जूझ रहा है।