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Bulandshahar News: डिबाई तहसील परिसर में अधिवक्ता के चैंबर पर दिखा तेंदुआ

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संवाद न्यूज एजेंसी
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डिबाई।
तहसील परिसर में बृहस्पतिवार सुबह 11:30 बजे तेंदुआ घुस आया। एक ग्रामीण और पुलिसकर्मी ने अधिवक्ता के चैंबर की छत पर घूमते हुए देखकर शोर मचाया। इसके बाद तहसील परिसर में भगदड़ मच गई। कार्यालय और अधिवक्ताओं के चैंबर के गेट बंद कर लिए गए। जब तक वन विभाग की टीम पहुंची, तेंदुआ जा चुका था। वन विभाग की टीम को तेंदुए के पद चिन्ह भी नहीं मिले हैं।
सिविल कोर्ट में ड्यूटी पर तैनात सिपाही अजय कुमार और ललित कुमार, अधिवक्ता ओपी शर्मा, मनोज कुमार व ओमवीर सिंह ने बताया कि तेंदुआ लगभग ढाई फुट लंबा रहा होगा। उसकी ऊंचाई करीब एक फुट थी। जैसे ही शोर मचा तेंदुआ तहसील परिसर के पीछे झाड़ियों की ओर भाग गया। तेंदुआ घुसने की सूचना पर एसडीएम प्रियंका गोयल भी मौके पर पहुंची। उन्होंने नरौरा से वन विभाग के रेंजर केडी शर्मा, वन दरोगा दीपक कुमार को बुला लिया। वन विभाग की टीम खाली हाथ ही पहुंच गई। उनके पास कोई उपकरण नहीं था। शुक्र है कि तेंदुआ जा चुका था।
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एसडीएम ने वन विभाग के अधिकारियों को ड्रोन से तलाश करने के निर्देश दिए हैं। परिसर में उगी झाड़ियों को भी काटने के लिए उन्होंने निर्देशित किया। रेंजर केडी शर्मा ने बताया कि तेंदुआ के कोई निशान नहीं मिका है। उनका कहना है कि हो सकता है जंगली बिल्ली रही हो। फिर भी तलाश की जा रही है। डीएफओ विनीता सिंह ने कहा कि अभी तक जिले में कहीं पर भी तेंदुआ होने के निशान नहीं मिले हैं। हमला करने वाले जंगली जानवर को पकड़ने के लिए लगातार पिंजरा और जाल लगाया जा रहा है। ऐसी घटनाओं को लेकर विभाग पूरी तरह से सजग है। डिबाई तहसील में जंगली बिल्ली हो सकती है। सर्च अभियान जारी है।

बड़ी आबादी के लिए खतरा बना तेंदुआ
तहसील परिसर में घुसा तेंदुआ बड़ी आबादी के लिए खतरा है। जिस समय तेंदुआ देखा गया, तहसील के पीछे बने राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज में 305 छात्र-छात्राएं मौजूद थे। 57 छात्र और 5 स्टाफ के लोग हॉस्टल परिसर में थे। एडवोकेट ओमवीर सिंह ने बताया कि तहसील परिसर में 105 अधिवक्ता कार्यरत है। तहसील के पीछे बने राजकीय 100 बेड अस्पताल में 200 से 300 मरीज प्रतिदिन आते हैं। जिनके साथ तीमारदार भी होते हैं। वहां बने आवासों में चिकित्सक और अन्य स्टाफ रहता है। तहसील में भी रोजाना लोग अपने काम के लिए आते हैं।
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लगातार देखा जा रहा तेंदुआ
वन विभाग लगातार क्षेत्र में तेंदुआ न होने का दावा कर रहा है लेकिन पिछले दो माह में एक वृद्ध किसान समेत अहार, ऊंचागांव और नरसेना क्षेत्र में कई पशुओं को जंगली जानवर अपना शिकार बना चुका है। पिछले साल भी शिकारपुर क्षेत्र में एक तेंदुआ की जाल में फंसकर मौत हो चुकी थी। स्याना क्षेत्र में एक तेंदुआ का शावक मिला था। बाद में इलाज के दौरान मथुरा में उसकी मौत हो गई थी।

इन तिथियों में देखा गया तेंदुआ
- 19 मार्च को गांव गजरौला के जंगल में
- 20 मार्च को गांव पिलखनी में
- 22 मार्च को गांव गजरौला के बाग में
- 23 मार्च को पिलखनी के जंगल में
- 26 मार्च को गांव औरंगाबाद ताहारपुर में
- चार अप्रैल को गांव घुंसरावली में
- जंगली जानवर गांव औरंगाबाद ताहारपुर, अहार, पिलखनी समेत कई गांवों में कर चुका है हमला



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