प्राथमिक विद्यालयों पर करोड़ों खर्च के बावजूद शिक्षा की सूरत नहीं बदलती। लेट लतीफी शिक्षक ही प्राथमिक स्कूलों को पलीता लगा रहे है। यह कहना भी गलत नहीं होगा। शिकारपुर क्षेत्र के भैंसरौली गांव स्थित एक स्कूल में बच्चे सुबह स्कूल गेट का ताला खोलते है, झाडू लगाते है, मास्साब की कुर्सियां मेज लगाते है। उसके घंटों बाद भी बच्चे शिक्षक का इंतजार करते नजर आते है।
प्राथमिक विद्यालयों की दशा और दिशा सुधारने में शिक्षकों की विशेष भूमिका होती है लेकिन क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों की दशा बिगाड़ने में शिक्षक ही जिम्मेदार है। भैंसरौली गांव के एक स्कूल में बच्चों के स्कूल गेट का ताला खोलने से लेकर झाडू लगाने तक का मामला सामने आया है।
इतना ही नहीं आरोप है कि शिक्षक 8 बजे के स्कूल में 10 बजे तक पहुंचते है। ऐसा मात्र एक स्कूल का हाल नहीं है। जनपद में ऐसे अनेक स्कूल ऐसे है जहां बच्चों को ही स्कूल की साफ-सफाई करनी पड़ती है और शिक्षक घंटों लेट आते है।
सूबे की सरकार प्राथमिक विद्यालयों की दशा बदलने के लिए बायोमैट्रिक एटेंडेंस का प्रयोग करने जा रही है। लेकिन शिक्षक अपने पुराने ढर्रे पर चलने से बाज नहीं आ रहे हैं। ग्रामीणों ने कहना है कि स्कूल की चाबी बच्चों के पास रहती है। वही स्कूल खोलते हैं, झाड़ू लगाते हैं और पानी का छिड़काव करते हैं। शिक्षक उसके बाद ही देरी से लगभग 10 बजे तक आते हैं।