500-1000 के नोट बंद होने के बाद जनधन अकाउंट में 476 करोड़ रुपये जमा कराए गए हैं। पांच अक्तूबर तक जिले के कुल 6.42 लाख जनधन अकाउंट्स में महज 124 करोड़ रुपये जमा थे। इन 18 दिनों में ऐसे खातों में जमा राशि 600 करोड़ रुपये पहुंच गई है। एकाएक बड़े ट्रांजक्शन होने से अंदेशा है कि इन खातों में काले धन को छिपाने की होड़ लगी है।
हालांकि, आयकर विभाग की इन खातों पर नजर है। केंद्र सरकार ने जनधन योजना के तहत 6.42 लाख गरीबों के बैंक खाते खुलवाए थे। इन खातों में 50 हजार रुपये जमा करने की लिमिट है। मतलब, कोई खाताधारक 50 हजार रुपये तक जनधन खातों से लेनदेन कर सकता है। आठ नवंबर को आरबीआई ने बड़े नोट अचानक बंद कर दिए।
इसके बाद जनधन खातों में मोटी रकम जमा करने का खेल शुरू हो गया। इन अकाउंट्स में लिमिट क्रास कर दो-दो, ढाई-ढाई लाख रुपये तक जमा कराए गए। जिन खातों में डेढ़ साल के भीतर एक भी ट्रांजेक्शन नहीं हुआ। उन जनधन खातों में अचानक धन बरसने लगा। सूत्रों का कहना है कि जनधन अकाउंट्स पर लेबर क्लास का कब्जा है।
लेबर क्लास जरूर किसी न किसी फर्म से जुड़ा हुआ है। जहां लेबर वर्ग काम करता है। उस फर्म के मालिकों ने काले धन को सफेद करने के लिए जनधन खातों का सहारा लिया है।
बढ़ा पीएम के भाषण से हौसला
पीएम मोदी ने गाजीपुर की सभा में कहा था कि जिन खातों में 2.50 लाख रुपये जमा हैं उन खातों के बारे में मेरा अधिकारी पूछेगा भी नहीं। पीएम के भाषण के बाद जनधन अकाउंट्स में एकाएक ट्रांजेक्शन बढ़ गए।
जांच की जाएगी कि इन खातों में धन कहां से आया। जो जनधन खाते एक-एक रुपये के लिए मोहताज थे उनमें धनवर्षा कैसे होने लगी। यह कुछ गलत की ओर जरूर इशारा करता है। वैधानिक जांच की जाएगी।
बीके दीक्षित, असिस्टेंट कमिशनर, आयकर
पांच अक्तूबर तक जनधन खातों में जमा राशि 124 करोड़ थी। नौ नवंबर के बाद एकाएक अकाउंटस में कुल धनराशि 600 करोड़ रुपये हो गई। जनधन खातों में की आवाजाही कैसे बढ़ी यह जांच का विषय है।
सतपाल मेहता, लीड बैंक अफसर