बुलंदशहर। श्रमिकों की बेटियों के लिए चलाई जा रही कन्या विवाह योजना में फर्जीवाड़ा कर अपात्रों को योजना का लाभ देने के मामले में श्रम प्रवर्तन अधिकारी सुभाष चंद्र को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। साथ ही सहायक श्रम आयुक्त मुकेश कुमार दीक्षित का कानपुर स्थानांतरण कर दिया गया है। इस मामले में एक पूर्व महिला प्रधान के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। फर्जीवाड़े की अभी जांच जारी है।
नवंबर में कन्या विवाह योजना के तहत गाजियाबाद में सामूहिक विवाह समारोह का आयोजन हुआ था। जिसमें जिले से 550 जोड़ों की शादी हुई थी। बाद में खुलासा हुआ कि गांव भर्रा की पूर्व प्रधान ने अपनी दो बेटियों के नाम पर भी योजना का लाभ लिया है। इसमें कई विभागीय अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई। विभागीय अधिकारियों ने अपने बचाव के लिए गांव भर्रा की पूर्व प्रधान संगीता के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी। मामले की जांच श्रम उपायुक्त गाजियाबाद को सौंपी गई थी। फर्जीवाड़े की जांच शुरू हुई तो एक के बाद एक परतें खुलती चली गईं। जांच के बाद उन्होंने पूरे प्रकरण की रिपोर्ट बनाकर श्रम आयुक्त उत्तर प्रदेश शकुंतला गौतम को भेजी थी। जिस पर अब कार्रवाई की गई है।
अभी भी चल रही जांच
श्रम विभाग में कन्या विवाह योजना के तहत जो शादियां हुई हैं, उनकी अभी भी जांच चल रही है। जिला विकास अधिकारी पूरे मामले में जांच कर रहे हैं। जांच के लिए कानपुर से भी अफसरों को लगाया गया है। बताया गया कि स्याना, लखावटी समेत कई ब्लॉकों में ऐसे लोगों के विवाह हुए हैं, जिनके बेटियां नहीं हैं या फिर आवेदन करते समय गलत नाम और फोटो लगाकर योजना का लाभ लिया गया है।
शासन ने श्रम आयुक्त उत्तर प्रदेश ने श्रम प्रर्वतन अधिकारी को निलंबित किया है। सहायक श्रमायुक्त का स्थानांतरण हो गया है। श्रम विभाग ने जितनी भी शादियां कराई थीं, उनकी जांच चल रही है। प्रकरण में जो दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - रवि श्रीवास्तव, डीएलसी गाजियाबाद
श्रम विभाग ने जो शादियां कराई हैं, उनकी जिला विकास अधिकारी जांच कर रहे हैं। योजना का लाभ लेने वाले सभी लाभार्थियों का ब्लॉकवार सत्यापन होगा। सभी शिकायतों का संज्ञान लिया गया है। शासन को पूरी रिपोर्ट भेजी जाएगी। - कुलदीप मीना, मुख्य विकास अधिकारी।