नानी के इंतकाल के बाद मिट्टी डालने गए थे दोनों
पीरजादगान मोहल्ला के कल्ले हकीम चौक निवासी जीशान ने बताया कि उनके ताऊ का बेटा मुजम्मिल (35) और चाचा का बेटा असद (21) शनिवार को बाइक पर सवार होकर अनूपशहर गए थे। जहां शुक्रवार को असद की नानी का इंतकाल हो गया था तो शनिवार को उनको सुपुर्द ए खाक किया गया। परिवार के अन्य लोग भी अलग-अलग सवारियों से अनूपशहर गए हुए थे।
कार ने मारी जोरदार टक्कर
कुछ लोग पहले ही खुर्जा आ गए थे तो कुछ अनूपशहर में ही थे। दोपहर करीब तीन बजे मुजम्मिल और असद दोनों अनूपशहर से खुर्जा के लिए रवाना हुए थे। शाम करीब चार बजे जब एनएच-34 पर बगराई कट के पास पहुंचे। तभी अलीगढ़ की ओर से आ रही तेज रफ्तार कार ने बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि मुजम्मिल और असद दोनों करीब 200 मीटर दूर जाकर गिरे और लहूलुहान हो गए। बाइक के परखच्चे उड़ गए और कार के एयर बैग तक खुल गए। राहगीरों ने हादसे की सूचना पुलिस को दी। पुलिस टीम मौके पर गई और घायलों को जटिया अस्पताल पहुंचाया। जहां चिकित्सकों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
घर ही नहीं पूरे मोहल्ले में पसरा मातम
सूचना पर परिवार के लोग भी अस्पताल पहुंच गए। दोनों भाइयों को मृत देख परिजन बिलख उठे। वहीं, मोहल्ले में मातम पसर गया। अनूपशहर गमी में मौजूद परिवार के लोग भी हादसे के बाद खुर्जा आ गए। वहीं, पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम जांच के लिए भेज दिया।
दोनों भाइयों की सब्जी मंडी में थी दुकान
जीशान ने बताया कि असद के पिता जहीर और मुजम्मिल के पिता रियाजुद्दीन की खुर्जा मंडी में सब्जी की दुकान है। वहीं पर असद व मुजम्मिल भी बैठते थे। मंडी में परिवार के अन्य लोगों की भी दुकान है तो सभी लोग एक जुट होकर रहते थे। घटना के बाद से परिवार के लिए दुख की घड़ी है। ऐसे में मंडी में अधिकांश दुकानें बंद रहीं।
पांच साल पहले भाई तो एक साल पहले मां की हो गई थी मौत
असद की बड़ी बहन नाजिस रोते बिलखते हुए बता रही थी कि एक साल पहले ही उनकी मां नजरीन की ब्रेन हेमरेज से मौत हो गई। इसके अलावा पांच साल पहले बड़े भाई की भी बीमारी से मौत हो गई। नाजिस का निकाह हो गया था तो घर में पिता जहीर और असद मिल-बांटकर काम करते थे। पैरालाइज्ड होने के चलते 21 वर्षीय असद के बाएं हाथ पैर काम नहीं करते थे। फिर भी मेहनत करता था।
ढाई साल की बेटी समेत परिवार के आठ लोगों का सहारा छूटा
पिता रियाजुद्दीन ने बताया कि सब्जी मंडी की दुकान मुजम्मिल ही संभालता था। घर में वह, उनकी पत्नी, मुजम्मिल, उसकी पत्नी, ढाई वर्षीय बेटी और तबुस्सम, तरन्नुम, छोटी और शाहीन चार बहन सभी के पालन-पोषण की जिम्मेदारी मुजम्मिल पर थी। बहनों के निकाह के लिए भी मुजम्मिल मेहनत करता था। बेटे की मौत के बाद परिवार के आठ लोगों का सहारा छूट गया।