बुलंदशहर। जिले का वायु प्रदूषण एक बार फिर खतरनाक होता जा रहा है। शनिवार को बुलंदशहर और खुर्जा का एक्यूआई 300 से अधिक मापा गया। यह देश के 254 सबसे प्रदूषित शहरों में खुर्जा नौवें नंबर पर और बुलंदशहर दसवें स्थान पर रहा। ऐसे में पूरे दिन लोगों को सांस लेने में दिक्कत, गले में खराश व आंखों में जलन महसूस हुई।
नवंबर में दूसरी बार जिले की हवा फिर खराब स्तर में पहुंच गई है। बढ़ते वायु प्रदूषण में सुधार के लिए जिला प्रशासन के दावे विफल साबित होते नजर आ रहे हैं। पिछले कई दिनों में हवा में पीएम-2.5 और पीएम-10 कणों की मात्रा सामान्य सीमा से पांच गुना बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि वाहनों से निकलने वाला धुआं, कूड़ा-कचरा से उठने वाला धुआं, निर्माण कार्य और मौसम में नमी की कमी प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण हैं। वहीं, शहर की सड़कों पर लगातार लग रहे जाम से भी वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ रहा है।
शनिवार को बुलंदशहर का पीएम-2.5 का औसत स्तर 315 और अधिकतम 432 रहा, जबकि पीएम-10 का औसत स्तर 305 और अधिकतम 425 दर्ज किया गया। वहीं, खुर्जा का पीएम-2.5 का औसत स्तर 287 और अधिकतम 408 रहा, जबकि पीएम-10 का औसत स्तर 314 और अधिकतम 471 दर्ज किया गया। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी बुलेटिन में शनिवार को देश का सबसे प्रदूषित शहर रोहतक का 374 एक्यूआई मापा गया। जबकि खुर्जा का 312 एक्यूआई रहने पर नौवां व बुलंदशहर का 307 रहने पर देश का दसवां सबसे प्रदूषित शहर रहा। इसके अलावा दिल्ली का 361, नोएडा का 354, गाजियाबाद का 339, ग्रेटर नोएडा का 336, हापुड़ का 334, बहादुरगढ़ का 325 और मेरठ का 318 एक्यूआई रहा।
Iतापमान में गिरावट होने से वायु प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी हुई है। अन्य विभाग भी समय-समय पर वायु प्रदूषण की रोकथाम को लेकर प्रयास कर रहे हैं। - विमल कुमार, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्डI