कार्तिक स्नान पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़े और जाम न लगे, ऐसा नहीं हो सका। हर बार की तरह इस बार भी कार्तिक स्नान से पूर्व ही जाम की स्थिति बनना शुरू हो गई। रविवार को अनूपशहर, नरौरा चौराहा, राजघाट तौराहा और रामघाट नहर पुल पर वाहनों की लंबी लाइन लग रही।
जाम से निपटने के पुलिस और प्रशासन के सारे दावे फेल हो गए। कार्तिक स्नान मेला पर श्रद्धालुओं का तांता शनिवार से ही लगने लगा था, लेकिन रविवार देर शाम से उनकी संख्या अचानक बढ़ गई। अनूपशहर में शाम के समय जाम की स्थिति बनना शुरू हो गई।
स्थिति बिगड़ती देख वाहनों को जहांगीराबाद के पास ताल बिवियान मार्ग होते हुए निकाला गया। बसों को अनूपशहर से करीब दो किमी पहले ही रोक दिया गया। इसी प्रकार नरौरा, रामघाट और राजघाट पर भी शाम होने से पहले ही जाम की स्थिति बनने लगी।
इसके चलते वाहन चालकों और उनमें सवार यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। गंगा स्नान को कर्ण जाने वाले वाहनों के चलते डिबाई में भी जाम की समस्या बन गई। उधर, माड़ू घाट, सिद्धबाबा और अहार में अवंतिका देवी मंदिर पर गंगा स्नान के चलते शाम तक वाहनों की लंबी-लंबी कतार लगना शुरू हेा गई थी। जाम से राहत दिलवाने को पुलिस भी सतर्क दिखाई दी।
अनूपशहर में ड्रोन से हुई निगरानी
बुलंदशहर/अनूपशहर(ब्यूरो)। कार्तिक मेला के तहत गंगा स्नान शुरू होने से पहले ही अनूपशहर में ड्रोन से श्रद्धालुओं की निगरानी शुरू हो गई। गांव में नाव और गोताखोर गंगा में उतर गए और पुलिस भी तैनात हो गई।
कंट्रोल रूम में सीसीटीवी कैमरों से मेला क्षेत्र गंगातट पर नजर रखी जा रही थी। रविवार दोपहर एसडीएम भैरपाल सिंह और पुलिस अफसरों की मौजूदगी में ड्रोन का परीक्षण किया, जो सफल रहा। किया दीपदानकार्तिक चतुर्दशी को मृतकों की आत्मा की शांति के लिए श्रद्धालुओं ने गंगातट पर दीपदान किया।
पुरोहितों को दानपुण्य किया। मनोकामना पूरी होने पर श्रद्धालु दंडौती कर अनूपशहर गंगास्नान के लिये पहुंचे। श्रद्धालुओं के दीपदान से मां गंगा की छठा अनूठी नजर आई। कार्यक्रम की रही भरमारनगर पालिका चेयरपर्सन मंजू शर्मा ने बताया कि मेला में 26 नवंबर को विशाल रसियों के दंगल का आयोजन किया गया है।
27 को डॉग शो तथा 28 को बच्चों की फैंसी ड्रेस व ब्यूटी कांटेस्ट का आयोजन किया जाएगा। वहीं, संतगण तीर्थनगरी में पहुंच रहे हैं। मेहताजी का बाग, शिवानंद आश्रम, सोहमताऊ आश्रम, निजानंद धाम आदि में संतों ने डेरा डाल दिया है।
मुख्य स्नान आज, देर शाम तक शुभ मुहूर्त
अनूपशहर गंगातट पर कार्तिक पूर्णिमा गंगा स्नान सोमवार देर शाम तक चलेगा। पंडित और संतों ने बताया कि कार्तिक पूर्णिम पर गंगा स्नान से आत्मबल की प्राप्ति होती है। गंगा स्नान जिले के सभी घाटों पर होगा।
रमाशंकर तिवारी ने बताया कि पंचांग के अनुसार चतुर्दशी का समापन होने पर रविवार रात 11.17 बजे से ही पूर्णिमा पर डुबकी लगाने का शुभ मुहूर्त प्रारंभ हो गया। यह मुहूर्त सोमवार की शाम 7.30 बजे तक रहेगा । स्वतंत्र स्त्री शक्ति गंगा स्नान आज गंगनहर बलीपुरा पर होगा।
गंगा स्नान सत्यास्मि मिशन के बैनर तले होगा। सत्यास्मि मिशन के स्वामी कुमार सत्येंद्र सत्य साहिब ने स्नान में श्रद्धालुओं को आमंत्रित किया है। उन्होंने बताया कि इस गंगा स्नान से स्त्री शक्ति के सर्व भौतिक उन्नति के साथ सभी प्रकार के काल सर्प, पितृ दोष व कष्ट-संकट का निवारण होगा और शांति की प्राप्ति होगी।
शौचालयों की सफाई न होने पर आक्रोश मेले में डेरा डालकर रह रहे श्रद्धालुओं में बिजली आपूर्ति और शौचालय की सफाहई न होने पर आक्रोश देखा गया।
श्रद्धालुओं का आरोप है कि शनिवार रात्रि को बिजली आपूर्ति लगभग ठप रही और रविवार को भी बिजली आपूर्ति ठीक नहीं रही। मेले में छह मोबाइल शौचालय तो रखे गए हैं, मगर उनकी सफाई को कर्मचारी नहीं लगाए गए।
श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
मां गंगा के प्रति अटूट श्रद्धा के साथ हर-हर गंगे के जयघोष के साथ लाखों श्रद्धालुओं ने कार्तिक स्नान पर आस्था की डुबकी लगाई। देर रात को स्नाना शुरू हो गया। दीयो की रोशनी से जगमग गंगाघाटों पर श्रद्धा के इस अटूट संगम का नजारा कार्तिक स्नान पर दिखाई दिया। मां गंगा की आरती ने माहौल को भक्तिमय कर दिया। हालांकि इंतजाम को लेकर काफी कामी थी। अव्यवस्थाओं को लेकर लोगों में नाराजगी दिखी।
कार्तिक स्नान पर गंगा स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। रविवार को गंगाघाट श्रद्धालुओं से भरे नजर आए। मां गंगा में पावन स्नान के लिए क्या बुजुर्ग और क्या बच्चे, क्या महिलाएं और क्या पुरुष, सभी श्रद्धा के सरोबार में डूबे नजर आए।
रविवार रात 12 बजे से कार्तिक पूर्णिमा पर स्नान शुरू हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मां गंगा की आरती ने घाटों को भक्ति के सराबोर में डुबा दिया। अनूपशहर, नरौरा, रामघाट, अहार आदि गंगाघाटों पर श्रद्धालुओं ने स्नान किया।
घाटों पर श्रद्धा, सद्भाव और उल्लास का संगम ऐसा था कि हर कोई इसमें डुबकी लगाने के लिए आतुर था। अव्यवस्थाओं के बावजूद श्रद्धालुओं के चेहरे पर शिकन तक नहीं थी। अव्यवस्थाओं को भूल श्रद्धालु मेले के उल्लास में रमे रहे।