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जरा याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के घर न आए....

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जरा याद उन्हें भी कर लो, जो लौट के घर न आए....
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बुलंदशहर/गुलावठी/बीबीनगर/सिकंदराबाद/खुर्जा। कारगिल युद्ध में देश के लिए शहादत देने वाले शूरवीरों के परिजनों को सरकार की उदासीनता झेलनी पड़ रही है। हालत यह है कि शूरवीरों की शहादत के दौरान सरकारों ने परिजनों को विभिन्न सेवाएं देने का आश्वासन तो दिया लेकिन समय के साथ नेता अपने द्वारा किए गए वादों को भूल गए। जिसके चलते आज भी शहीदों के परिजनों को जीवन यापन में परेशानियां झेलनी पड़ रहीं हैं।
गुलावठी क्षेत्र के गांव औरंगाबाद अहीर निवासी परमवीर चक्र विजेता योगेंद्र यादव ने जब युद्ध लड़ते हुए गोलियां खाई और टाइगर हिल्स पर तिरंगा फहराया तो सरकार ने 15 अगस्त 1999 को उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया। इसके बाद राज्य सरकार ने उनके नाम से 100 बेड का अस्पताल बनाने की घोषणा की लेकिन शिलान्यास के बाद अब तक कार्य आगे नहीं बढ़ सका। तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने 1.265 हेक्टेयर भूमि पर अस्पताल का लखनऊ से ही शिलान्यास किया था। योगेंद्र यादव, उनकी मां संतरा देवी एवं छोटे भाई देवेंद्र यादव का कहना है कि अस्पताल बनाना किसी भी राजनीतिक दल के लिए निस्वार्थ कार्य होना चाहिए, लेकिन इसके बाद भी अस्पताल निर्माण के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
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आश्वासन 20 बीघे जमीन का, मिले 13 बीघा
गांव कुरली निवासी ऋषिपाल सिंह कारगिल युद्ध में पाक घुसपैठियों के ठिकानों पर हमला करके 15 पाकिस्तानी घुसपैठियों को मौत के घाट उतारा था। इस दौरान ऋषिपाल सिंह दुश्मनों की गोली लगने से शहीद हो गए थे। शहीद होने से पहले उन्होंने अपने देश की जीत के लिए टीम को आगे बढ़ा दिया था। ऋषिपाल सिंह के गांव कुरली में आज भी उनका स्मारक बना हुआ है, जहां प्रतिवर्ष कारगिल दिवस पर परिजन व ग्रामीण श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। शहीदों के परिजनों को सरकार ने आश्वासन दिया था कि 20 बीघा जमीन का पट्टा दिया जाएगा, लेकिन अभी तक 13 बीघा जमीन ही मिली है।
सुरेंद्र सिंह व ओमप्रकाश ने खट्टे किए थे दुश्मनों के दांत
बीबीनगर क्षेत्र के गांव सैदपुर निवासी सुरेंद्र सिंह अहलावत व गांव खैरपुर निवासी ओमप्रकाश रघुवंशी ने अपने साहस के दम पर ही दुश्मनों के दांत खट्टे कर दिए थे। मात्र 20 वर्ष की आयु में राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए सुरेंद्र सिंह ने 12 नवंबर 1986 से 16 मई 1987 तक जम्मू कश्मीर में हुए युद्ध में हिस्सा लिया। जिसके बाद श्रीलंका में आपरेशन पवन के दौरान 29 फरवरी 1988 से 24 मई 1989 तक दुश्मनों से लोहा लेते रहे। नायक सुरेंद्र सिंह ने श्रीलंका से दो बार विदेश सेवा पदक प्राप्त किया। कारगिल युद्ध के दौरान द्रास सेक्टर की तोलोंलिंग पहाड़ियों पर दुश्मनों से लोहा लेते हुए सुरेंद्र सिंह 13 जून 1999 को शहीद हो गए। जबकि गांव खैरपुर में जन्मे ओमप्रकाश रघुवंशी मात्र 19 वर्ष की उम्र में 29 मई 1986 को राजपूताना राइफल्स में भर्ती हुए। कारगिल युद्ध में उन्होंने दुश्मनों को पीछे धकेला था, लेकिन सीने पर लगी गोली के कारण वह शहादत को प्राप्त हुए थे। सरकार ने शहीद सुरेंद्र सिंह और शहीद ओमप्रकाश रघुवंशी के परिजनों को गैस एजेंसी दी थी।
शादी के 21 दिन बाद ही युद्ध लड़ने गए थे शहीद दाताराम
कारगिल युद्ध में खुर्जा क्षेत्र के गांव धराऊ और किशनगढ़ी के जवानों ने भी शहादत दी थी। गांव धराऊ निवासी शहीद दाताराम गौतम शादी के मात्र 21 दिन बाद ही युद्ध लड़ने के लिए पहुंच गए थे। करीब तीन दिन तक लड़ाई लड़ने के बाद वह शहादत को प्राप्त हुए तो पूरे जिले की आंखें नम हो गई थीं। शहीद दाताराम की याद में चौराहे पर मूर्ति लगाते हुए चौराहे का नाम ही दाताराम चौक रखा गया था। जबकि गांव किश्वागढ़ी निवासी शहीद कंछी सिंह ने युद्ध में दुश्मनों को हरा दिया था और टाइगर हिल्स पर तिरंगा फहरा रहे थे, लेकिन इसी दौरान एक दुश्मन ने उन पर गोलियां बरसाई थीं, जिससे कंछी सिंह शहीद हो गए थे।
टाइगर हिल्स फतह के दौरान मुकेश यादव को लगी थी गोली
सिकंदराबाद क्षेत्र के गांव इस्माइलपुर निवासी लांस नायक मुकेश यादव गर्दन में गोली लगने से घायल हुए थे। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना में 18 ग्रेनेडियर बटालियन में जम्मू-कश्मीर में लांस नायक के रूप में तैनात रहे मुकेश यादव की टोली ने 30 जून 1999 को ऑपरेशन शुरू किया था, जिसे पांच जुलाई तक पूरा किया जा सका था। ऑपरेशन के दौरान तीन ऑफिसर, दो जेसीओ, 37 सैनिकों को खोया, लेकिन मुकेश का हौसला कम नहीं हुआ और गर्दन में गोली लगने के बाद भी उन्होंने टाइगर हिल फतह किया था।
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बलिदानी सैनिक स्मारक का होगा शिलान्यास
अखिल भारतीय पूर्व सैनिक सेवा परिषद के तत्वावधान में अनूपशहर के बबस्टरगंज गंगा घाट के पास 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के मौके पर कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। संगठन के प्रदेशमंत्री हरिप्रकाश सिंह ने बताया कि कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में बलिदानी सैनिक स्मृति स्मारक का शिलान्यास किया जाएगा। जिसके मुख्य अतिथि भाजपा के प्रदेश सहसंगठन मंत्री कर्मवीर सिंह रहेंगे।
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