भारतीय जनता पार्टी जिले की एकमात्र सीट पर बुरी तरह उलझी हुई है। सीट पर तीन कद्दावर नेताआें का दावा है। पूर्व मुख्यमंत्री की पारंपरिक सीट पर चुनाव लड़ने को लेकर रार मची हुई है। इसी का नतीजा है कि पार्टी को उम्मीदवार तय करने में मुश्किल हो रही है।
भारतीय जनता पार्टी जिले की छह सीटों पर अपने उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। डिबाई सीट पर पार्टी अपना उम्मीदवार तय नहीं कर पा रही है। यह सीट पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की पारंपरिक सीट रही है। 1996 के विधानसभा चुनाव में वह इसी सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे।
इसके बाद उन्होंने यह सीट अपने बेटे राजवीर सिंह के लिए छोड़ दी। 2002 में राजवीर सिंह ने इसी सीट से चुनाव जीता। इसके बाद 2007 और 2012 में डिबाई विधानसभा पर राजवीर सिंह दो बार गुड्डू पंडित से चुनाव हारे। वर्तमान में राजवीर सिंह एटा से सांसद हैं।
अब इस सीट पर एक महिला पूर्व विधायक और एक पूर्व विधायक के पुत्र का नाम आगे चल रहा है। इसके अलावा एक महिला नेत्री ने भी डिबाई सीट पर मजबूत दावा पेश किया है। पार्टी के तीन कद्दावर दावेदारों के कारण प्रत्याशी चयन में काफी मुश्किल हो रही है।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के इस सीट पर अड़ जाने के कारण भी प्रत्याशी तय नहीं हो पा रहा है। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने में अब महज दो दिन का समय शेष है। ऐसे में माना जा रहा है कि रविवार को पार्टी इस सीट पर उम्मीदवार का एलान कर सकती है।इससे इस सीट पर चुनावी मुकाबला और भी रोमांचक हो सकता है।