बुलंदशहर। जिलावासियों के लिए अच्छी खबर है। शहरों में पेयजल की बर्बादी और पाइपलाइन में होने वाली लीकेज पर लगाम लगाने के लिए जल निगम यूरोपीय तकनीक आधारित व्यवस्था लागू करने जा रहा है। पायलट परियोजना के तहत जिले के यमुनापुरम और खुर्जा क्षेत्र का चयन किया गया है।
यहां घर-घर पानी के मीटर लगाए जाएंगे। इन मीटरों के जरिये पानी की खपत के साथ पाइपलाइन में होने वाली लीकेज समेत कई मानकों की निगरानी की जाएगी। योजना पूरी होने के बाद दोनों क्षेत्रों में लोगों को 24 घंटे पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा।
पायलट परियोजना के तहत शुरू में 12 हजार लोगों को इसका लाभ मिलेगा। बता दें कि यूरोपीय तकनीक एक ऐसी आधुनिक तकनीक से है, जिसका इस्तेमाल पानी की पाइपलाइनों में लीकेज खोजने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए किया जाता है। इसमें सेंसर, स्मार्ट मीटर और डिजिटल मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल हो सकता है।
24 घंटे पेयजल योजना के तहत यमुनापुरम और खुर्जा में पेयजल आपूर्ति के लिए नई व्यवस्था विकसित की जा रही है। इसका सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा घरों पर लगने वाले मीटर होंगे।
ये सामान्य मीटर से अलग होंगे और पानी की आपूर्ति व खपत का आंकड़ा दर्ज करने के साथ नेटवर्क में पानी के नुकसान का पता लगाने में भी मदद करेंगे। इससे यह भी पता चल सकेगा कि सप्लाई के दौरान कितना पानी उपभोक्ताओं तक पहुंचा और कितना पानी रास्ते में बर्बाद हुआ।
यमुनापुरम में 1400 घरों को मिलेगा कनेक्शन
यमुनापुरम में करीब 1400 और खुर्जा में करीब 900 मकानों के लिए पेयजल कनेक्शन जारी किए जाने हैं। इन घरों पर मीटर भी लगाए जाएंगे। क्षेत्र में योजना के तहत काफी काम हो चुका है, लेकिन मुख्य लाइन बिछाने का काम अभी शेष है।
अधिकारियों के अनुसार करीब 50 फीसदी काम अभी बाकी है। मुख्य लाइन पूरी होने के बाद कनेक्शन देने और मीटर लगाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
वहीं, खुर्जा में परियोजना का करीब 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। यहां शेष कार्य को भी निर्धारित समय सीमा में पूरा करने की तैयारी है। दोनों क्षेत्रों में परियोजना को मार्च 2027 तक पूरा किया जाना है।
पुरानी व्यवस्था में पानी की बर्बादी बड़ी चुनौती
शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के दौरान पाइपलाइन लीकेज, अवैध कनेक्शन और जरूरत से अधिक पानी के इस्तेमाल के कारण बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद होता है। कई स्थानों पर पाइपलाइन में खराबी का पता भी काफी देर से चलता है। नई तकनीक आधारित मीटर व्यवस्था में नेटवर्क पर निगरानी बढ़ने से इस तरह के नुकसान को कम करने की उम्मीद है।
स्वचालित क्लोरिनेशन पर काम कर रही नगर पालिका
नगर में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पहले भी कई योजनाओं पर काम किया गया है। नगर पालिका क्षेत्र में 38 ट्यूबवेल और 20 मिनी ट्यूबवेल समेत कुल 58 स्रोतों पर स्वचालित क्लोरीनेशन सिस्टम लगाने की योजना पर काम चल रहा है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इसका उद्देश्य लोगों को नियमित और मानक के अनुरूप पेयजल उपलब्ध कराना है।
मार्च 2027 तक पूरी करनी है परियोजना
पायलट परियोजना सफल रही तो भविष्य में इस तरह की व्यवस्था अन्य शहरी क्षेत्रों में भी लागू किए जाने की संभावना है। फिलहाल जल निगम की प्राथमिकता यमुनापुरम और खुर्जा में बचे कार्य को पूरा करना है। मुख्य लाइन बिछने के बाद कनेक्शन और मीटर लगाने का काम तेजी से आगे बढ़ेगा। इसके बाद पानी की आपूर्ति, खपत और लीकेज की स्थिति का तकनीक के माध्यम से आकलन किया जा सकेगा।
कोट
यमुनापुरम और खुर्जा में 24 घंटे पेयजल उपलब्ध कराने के साथ ही यूरोपीय तकनीकी वाले मीटर लगाए जाएंगे। इससे पानी की खपत के साथ प्रेशर, लीकेज व अन्य जानकारी आसानी से विभाग को मिल सकेंगी। इसके लिए शासन स्तर पर मीटर सप्लाई की तैयारी हो रही है।
- आशीष खेवरिया,
एक्सईएन, जल निगम