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Bulandshahar News: सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है

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खुर्जा। क्रांतिकारी राम प्रसाद बिस्मिल की लिखी गई गजल सरफ़रोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-क़ातिल में है, खुर्जा के रानी वाला चौक निवासी स्वतंत्रता सेनानी 100 वर्षीय मदनलाल शर्मा ने सुनाई। उन्होंने आजादी से पहले के दौर के बारे में बताया। मदनलाल शर्मा ने बताया कि 1942 में चौक पर झंडा फहराने पर उन्हें जेल भेज दिया गया था।
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रानी वाला चौक निवासी मदनलाल शर्मा पुत्र पंडित सुदामा शर्मा का जन्म 1923 में हुआ था। मदनलाल शर्मा ने बताया कि उनके पिता खेती करते थे। बताते हैं, आजादी से पहले का दौर बिल्कुल अलग था। उस वक्त बच्चों का बाहर खेलना, युवाओं का घूमना और महिलाओं का घर से बाहर निकलना भी मुश्किल था। स्कूल और पढ़ाई के अधिक संसाधन नहीं थे। खुर्जा में एनआरईसी कालेज बन गया था, इसलिए वहीं से स्नातक की। वहां अन्य जिले व प्रदेश के बच्चे भी पढ़ने आते थे। 1930 के बाद आजादी को लेकर लोगों में काफी जोश आ रहा था। इसलिए जगह-जगह क्रांतिकारियों के नेतृत्व में गोपनीय रूप से बैठक और पंचायत होती थी।
अक्टूबर 1942 में तिरंगा रैली निकालने के आरोप में उन्हें बुलंदशहर स्थित जेल और फिर बरेली जेल में कैद किया गया था। क्रांतिकारी मदनलाल को तिरंगा रैली निकालने पर एक वर्ष की सजा हुई थी। साथ ही सरकार के खिलाफ सबूत मिलने पर नौ माह की सजा और बढ़ाई गई थी। 1944 में एक साल नौ माह की सजा पूरी करने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया।
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शान से लहरा रहा था तिरंगा, बांटी जा रहीं थी मिठाइयां

जिस तिरंगे को लहराने के आरोप में वह जेल गए थे, आजादी के दिन वही तिरंगा शान से सभी स्थानों पर लहरा रहा था। 1946 से ही आजादी को लेकर तैयारी हो गई थी। जगह-जगह आंदोलन शुरू हो गए थे। 15 अगस्त 1947 को हर गली-हर मोहल्ले में तिरंगा लहराता देख उन्हें अपार खुशी मिल रही थी। हर किसी के चेहरे पर आजाद देश में सांस लेने की खुशी थी। लोग एक दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी जाहिर कर रहे थे।



आज भी गुनगुनाते रहते हैं आजादी के गीत

कालोनी निवासी शुभम ने बताया कि मदनलाल शर्मा वृद्ध हो गए हैं, उनके सुनने की क्षमता कम हो गई है। मगर अभी भी देश भक्ति काफी अधिक है। वह कभी भी जोर-जोर से आजादी के गीत गाते हुए नारे लगाने लगते हैं। जब भी उनके पास बैठते हैं तो वह क्रांति के दिनों से लेकर आजादी के दिनों की बातों को बताते हुए आजादी की खुशी का अहसास कराते हैं।
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