करोड़ों रुपये से सीवरेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए आई अमृत योजना भूमि के अभाव में अटक गई है। शहर में तीन स्थानों पर जगह नहीं मिल पाने से काम शुरू नहीं हो पा रहा है। इस योजना के परवान चढ़ने से शहर में जलभराव की समस्या पर हद तक लगाम लगने की उम्मीद है।
नगर के सीवरेज सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए अमृत योजना के तहत 583 करोड़ रुपये के बजट से एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) का निर्माण होना है। जल निगम ने एसटीपी के लिए मोहनकुटी को चिह्नित किया है।
सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए शहर में सात स्थानों पर आईपीएस (इंटरमीडिएटर पंपिंग स्टेशन) बनना था। चार स्थानों पर पालिका की जमीन चिह्नित कर ली गई, लेकिन तीन स्थानों के चुनाव के लिए अधिकारी मशक्कत कर रहे हैं।
निर्माणदायी संस्था ने आईपीएस निर्माण के लिए जीआईसी, जीजीआईसी और नुमाइश मैदान के आसपास जगह मांगी है लेकिन प्रशासन अब तक इसकी स्थापना के लिए जगह उपलब्ध नहीं करा सका है।
जलभराव की समस्या होगी कम
एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के निर्माण से शहर को जलभराव से छुटकारा मिल जाएगा। इसके अलावा नालों का गंदा पानी काली नदी या फिर गंगा में नहीं जाएगा। एसटीपी से साफ होने वाला पानी को गंगा या काली नदी में डाला जाएगा। इसके अलावा इस पानी का उपयोग सिंचाई के लिए भी किया जा सकेगा।
बोले अफसर
एसटीपी का निर्माण जल्द होना चाहिए। शहर में जलभराव की समस्या आम है। गली-मोहल्लों में थोड़ी सी बारिश से ही जलभराव हो जाता है। विजय गुप्ता, साठा