अवैध तरीके से हो रही नशीली दवाआें की सप्लाई में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में पता चला है कि नशीली दवाओं की सप्लाई के लिए बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्ट कंपनी खोल दी गईं। अवैध दवा कारोबारियों ने पिछले एक साल में करीब 10 ट्रांसपोर्ट कंपनी खोलीं। एक बार अवैध दवा की खेप उतरते ही उस ट्रांसपोर्ट कंपनी बंद कर दी जाती और फिर नई कंपनी खोलकर यह कारोबार आगे बढ़ाया जाता।
हापुड़ से आगरा होता हुए बांग्लादेश और बिहार को प्रतिबंधित नशे की दवाओं की सप्लाई की जा रही थी। वाणिज्य कर विभाग ने करीब 50 लाख रुपये की दवाओं की खेप पकड़ी थी। इसके बाद पूरे मामले की जांच में नशे की इस दवा के तार बुलंदशहर से जुड़े पाए गए। बुलंदशहर के दर्जनभर से ज्यादा व्यापारी इस अवैध कारोबार में लिप्त थे।
वाणिज्य कर विभाग की जांच में पता चला है कि प्रतिबंधित दवाओं की सप्लाई कर रहे कारोबारी हर बार नई ट्रांसपोर्ट कंपनी बनाते थे और एक खेप उतारने के बाद उस ट्रांसपोर्ट कंपनी को बंद कर फिर नई ट्रांसपोर्ट कंपनी बना लेते थे। पिछले एक साल में प्रतिबंधित दवा के कारोबारियों ने 10 ट्रांसपोर्ट कंपनी बनाईं।
हर बार ट्रांसपोर्ट कंपनी बदले जाने से अफसरों को शक नहीं हुआ। इसी के चलते नशे का यह कारोबार फलता-फूलता चला गया। पूरे मामले की जांच चल रही है। जांच में बड़ा खुलासा हुआ कि ट्रांसपोर्ट कंपनी बार-बार बदली जाती रही। हर बार खेप उतरने के बाद पुरानी ट्रांसपोर्ट कंपनी बंद कर नई कंपनी बना ली जाती। विकास सेठ, असिस्टेंट कमिश्नर, वाणिज्य कर विभाग