मिर्ची मुर्गा के नाम से प्रसिद्ध हरदिल अजीज आरजे नावेद खान ने कभी यह सोचा ही नहीं था कि वह रेडियो जॉकी बनेंगे।
शौकिया एक आरजे हंट में शामिल हुए नावेद धीरे-धीरे इस काम में ऐसे रच बस गए कि आज एफएम की दुनिया में उनकी आवाज का जादू चलता है। आज रेडियो मिर्ची और नावेद एक-दूसरे के पूरक हैं।मध्यवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले बुगरासी के नावेद खान अक्सर यहां आते-जाते रहते हैं।
करियर की बुलंदियों पर पहुंचने के बाद भी नावेद अपनी जड़ों को नहीं भूले हैं। नावेद अक्सर सामाजिक समस्याओं को उठाने के लिए जाने जाते हैं। नावेद खान के पिता मकसूद अहमद खान जामिया में टीचर थे। कम आय के बावजूद नावेद खान की लगन और मेहनत ने उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाया है।
नावेद ने बताया कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह रेडियो जॉकी बनेंगे। वर्ष 2004 में दिल्ली में आरजे हंट कार्यक्रम में 35 हजार युवाओं के बीच उन्हाेंने भी अपनी किस्मत आजमाई थी। इसका ग्रांड फिनाले मुंबई में हुआ था।
आरजे हंट में भाग लेने के बाद नावेद रेडियो मिर्ची के होकर रह गए हैं। नावेद ने बताया कि वर्ष 2004 में रेडियो मिर्ची से उन्होंने अपने करियर शुरूआत की थी। इससे पूर्व वह कई कंपनियों में काम कर चुके हैं लेकिन रेडियो मिर्ची ने उन्हें एक अलग पहचान दी है। फिलहाल रेडियो मिर्ची से ही जुड़े रहने का इरादा है।