बुलंदशहर। दहेज की मांग को लेकर विवाहिता की हत्या के मामले में अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए पति को दोषी करार दिया है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/त्वरित न्यायालय-3 शिवानंद ने गवाहों के बयान, साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी पति को आठ साल की कैद और पांच हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई।
देहात कोतवाली क्षेत्र के गांव खेतलपुर भासौंली निवासी देवपाल सिंह ने नगर कोतवाली में तहरीर देकर बताया था कि उनकी पुत्री शालू की शादी वर्ष 2014 में नयागांव चांदपुर निवासी अतुल के साथ हुई थी। शादी के बाद से ही ससुराल पक्ष दहेज की मांग को लेकर शालू को प्रताड़ित करने लगा। आरोप है कि 8 अक्तूबर 2018 को शालू को उसके पति अतुल और सास ऊषा देवी ने फंदे से लटकाकर मार डाला। घटना के बाद नगर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की। जांच पूरी कर पुलिस ने आरोपी पति अतुल और सास ऊषा देवी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान और पेश किए गए साक्ष्यों से पति अतुल का अपराध सिद्ध हो गया।
अदालत ने सास ऊषा देवी को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया, जबकि पति अतुल को दोषी मानते हुए आठ साल के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर अतिरिक्त एक माह का कारावास भुगतना होगा।