खुर्जा। दहेज की खातिर प्रताड़ित करने और आत्महत्या के लिए उकसाने पर न्यायालय ने दोषी पति को सात साल की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश दिलीप कुमार सचान ने मंगलवार को मामले में सजा सुनाई और चार हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। मामले में वादी की ओर से बयान बदले जाने पर उस पर मुकदमे के आदेश दिए।
औरंगाबाद थाना क्षेत्र के गांव बालका निवासी दीपक ने नौ अक्टूबर 2020 को खुर्जा नगर थाने में तहरीर दी थी। दीपक ने बताया था कि 29 जून 2020 को उन्होंने अपनी बहन निशा की शादी शाहपुर कला निवासी संदीप उर्फ सैंकी के साथ की थी। शादी में घर की जरूरत का सभी सामान दिया गया लेकिन ससुराल पक्ष संतुष्ट नहीं था। कोरोना काल में शादी करने की बात को लेकर ससुराल पक्ष रुपये बचाने बात कहकर निशा को प्रताड़ित करते थे।
निशा पर एक लाख रुपये नकद और बाइक की मांग को लेकर दबाव बनाया गया। निशा ने इस संबंध में अपने परिवार को बताया था। घटना के दो दिन पहले भी निशा का फोन आ रहा था और वह ससुराल पक्ष को बाइक दिलाने की बात कह रही थी। निशा काफी परेशान थी। नौ अक्टूबर की सुबह सूचना मिली कि ससुराल पक्ष ने उसकी हत्या कर दी है।
इस पर पुलिस टीम ने तहरीर के आधार पर संदीप, उसके पिता देवेंद्र और मां रेखा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की। इसके बाद न्यायालय में सुनवाई की गई। पुलिस विवेचना में मामला सामने आया कि निशा ने फंदे से लटककर आत्महत्या की गई थी। अपर सत्र न्यायाधीश दिलीप कुमार सचान ने बताया कि सभी साक्ष्य और गवाहों के आधार पर सोमवार को आरोपी पति संदीप उर्फ सैंकी दोषी सिद्ध हुआ।
झूठे बयान देने पर मृतका के भाई पर होगा मुकदमा : निशा के भाई दीपक ने पहले दहेज हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई। बाद में अपना बयान बदल दिया और कहा कि उसकी बहन गर्म मिजाज की थी, जिसके चलते उसने आत्महत्या कर ली। बयान बदलने और मिथ्या साक्ष्य प्रस्तुत करने पर न्यायाधीश ने दीपक के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए।