संवाद न्यूज एजेंसी
सिकंदराबाद। दो मंदबुद्धि बच्चों के साथ जर्जर-जर्जर कच्चे मकान में रह 74 साल के बूढ़े रफीक की आंखों में परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंता है। उम्र के साथ कमजोर हो चुकी आंखों में अब सरकारी मदद मिलने की आश भी उसकी आंखों की रोशनी की तरह कमजोर होती जा रही है। पीड़ित ने परिवार की सुरक्षा को लेकर अफसरों से मदद की गुहार लगाई है।
नगर के दामोदर पैलेस के सामने स्थित मोहल्ला सराय झाझन निवासी रफीक (74) ने बताया कि उसके तीन बेटे हैं। बड़े बेटे की शादी हो चुकी है, जो अलग रहता है। दोनों छोटे बेटे मंदबुद्धि हैं। दोनों बेटों के साथ वह कच्चे मकान में रहता है। उम्र के इस दौर में जहां उसे आराम की आवश्यकता है। वह मेहनत मजदूरी कर अपने दोनों मंदबुद्धि बेटों का किसी तरह पालन पोषण कर रहा है। उसका कच्चा मकान जर्जर हालत में है। खाने-पीने का ही किसी तरह मुश्किल से गुजारा चलता है। मकान बनाना, मकान की मरम्मत कराने उसके बूते से बाहर है। बारिश में उसके कच्चे मकान की छत टपकती रहती है।
जर्जर होने के कारण धीरे-धीरे मकान गिर रहा है। जिसको लेकर उसका और दोनों मंदबुद्धि बेटों का जीवन हर समय खतरे में रहता है। मकान बनवाने के लिए उसने कई बार प्रधानमंत्री आवासी योजना के अंतर्गत आवेदन किया। डूडा में उसने मकान बनवाने के लिए आवेदन किया। मकान बनना तो दूर की बात आवेदन के बाद कोई कर्मचारी उसके मकान का सर्वे तक करने नहीं पहुंचा। जबकि प्रधानमंत्री आवासीय योजना में बहुत से अपात्र लोगों ने अपने रसूख का इस्तेमाल कर योजना का लाभ ले लिया। उसके पात्र होने के बावजूद भी उसे योजना का लाभ नहीं मिल पाया। मकान नहीं बनने से रफीक जहां दुखी है वही उसने अफसरों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए है।
एसडीएम रेनू सिंह ने कहा कि रफीक ने अपनी परिवार के लोगों की सुरक्षा के लिए अफसरों से मदद की गुहार लगाई है। मौके पर तहसील टीम को भेजकर जांच कराई जाएगी। पीड़ित की हर संभव मदद कराई जाएगी।