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एंबुलेंस बनी खटारा, अस्पताल बना खंडहर

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एंबुलेंस बनी खटारा, अस्पताल बना खंडहर
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बुलंदशहर। कोरोना महामारी के दौर में भी उप स्वास्थ्य केंद्रों की बंद और जर्जर हालत होने के बाद भी उनके उद्धार के लिए कदम नहीं उठाए गए हैं। खानपुर क्षेत्र के उप स्वास्थ्य केंद्रों के बंद होने के कारण ग्रामीणों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
केस एक
छह किमी दूर जाकर हो रहा गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण
खानपुर क्षेत्र के गांव थौना की करीब 12 हजार की आबादी है। यहां अस्पताल बंद होने से सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को हो रही है। करीब छह वर्ष पूर्व नौ लाख की लागत से अस्पताल बना था तो ग्रामीणों को कुछ राहत की उम्मीद जगी थी, लेकिन पिछले एक साल से अस्पताल बंद होने से गर्भवती महिलाओं को टीकाकरण के लिए या तो निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है, या फिर करीब छह किमी का सफर तय करके खानपुर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जबकि वहां भी स्टाफ के कोविड ड्यूटी में होने के कारण उन्हें घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।
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केस दो
छह लाख की लागत से बना स्वास्थ्य उपकेंद्र जर्जर
गांव ढलना की आठ हजार की आबादी है। समाजवादी पार्टी की सरकार में गांव में करीब छह लाख की लागत से उप स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया था। जिससे लोगों को उम्मीद थी कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांव में कम से कम गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों को टीकाकरण की सुविधा तो दी जाएगी। हालांकि अस्पताल बनने से पहले जो हालात ग्रामीणों के थे, वही आज भी हैं। जिसके चलते चार किमी की दूरी तय करते हुए गर्भवती महिलाओं को खानपुर में जांच व टीकाकरण के लिए जाना पड़ रहा है। एक साल से यह केंद्र भी बद पड़ा हुआ है और जर्जर अवस्था में भी है।
केस तीन
डिबाई में विधायक निधि की एंबुलेंस बनी कबाड़
डिबाई क्षेत्र के लोगों को बेहतर सुविधा देने के लिए पूर्व विधायक श्रीभगवान शर्मा उर्फ गुड्डू पंडित ने विधायक निधि से करीब पांच लाख रुपये की एंबुलेंस स्वास्थ्य विभाग को छह वर्ष पूर्व भेंट की गई थी। जिसके बाद लोगों को उम्मीद जगी थी कि सस्ती दर पर उन्हें एंबुलेंस की सेवाएं मिल सकेंगी। इसके बाद भी अधिकारियों की लापरवाही के कारण एंबुलेंस को एक टीनशेड में खड़ा कर दिया गया है। जहां पर वह कबाड़ होती जा रही है। महामारी के इस दौर में भी एंबुलेंस का संचालन न होने से मरीजों को निजी एंबुलेंस के सहारे अस्पतालों में भर्ती किया जा रहा है।
बोले लोग
जल्द शुरू कराई जाए स्वास्थ्य सुविधा
अस्पताल बंद होने से सबसे अधिक गर्भवती महिलाओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। कोविड महामारी के साथ स्वास्थ्य विभाग को गर्भवती महिलाओं का भी ध्यान रखना चाहिए। उप स्वास्थ्य केंद्र पर जल्द से सेवाएं शुरू की जानी चाहिए।
सत्यपाल सिंह
छह किलोमीटर तय करना पड़ता है सफर
गांव के आसपास कोई अन्य स्वास्थ्य केंद्र नहीं है। जिसके चलते वैक्सीनेशन हो या जांच दोनों के लिए ही करीब छह किमी का सफर तय करना पड़ता है। खानपुर के अस्पताल में कोविड की जांच के चलते वहां पर भी काफी समय इंतजार में बर्बाद हो जाता है।
मूलचंद सिंह
दवाई और जांच की मिले सुविधा
स्वास्थ्य विभाग को ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए तत्काल अस्पतालों में सुविधाएं देनी चाहिए। मौसम में उतार चढ़ाव और महामारी के दौर में बड़ी संख्या में लोग बीमार हो रहे हैं। बच्चों और गर्भवती महिलाओं के साथ सामान्य बीमारी की दवाई भी केंद्र पर उपलब्ध होनी चाहिए।
वीरेंद्र कुमार
बेहतर हो स्वास्थ्य सेवा
महामारी को नियंत्रित करना जरूरी है। हालांकि ग्रामीणों को भी स्वास्थ्य सेवाएं देना भी उतना ही जरूरी है। स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में लोगों को अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है। मौसम खराब होने के कारण खानपुर आने-जाने में भी परेशानी होती है, जबकि अस्पताल में स्टाफ कम और काम अधिक होने से घंटों तक इंतजार करना पड़ता है।
- अनिल शर्मा
गांव में वैक्सीनेशन के लिए लगाया जाएगा कैंप
थौना और ढलना गांवों में वैक्सीनेशन कैंप लगाने के लिए तैयारी की जा रही है। वहां पर वैक्सीनेशन भी कराई जाएगी। यदि किसी भी बुजुर्गों या व्यक्ति को वैक्सीनेशन के लिए आने में कोई परेशानी है तो उनके लिए वाहन की व्यवस्था कराई जाएगी, ताकि वह टीकाकरण करा सकें। इसके साथ ही अस्पतालों में स्टाफ के लिए भी डीएम व सीएमओ को पत्र लिखा है।
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देवेंद्र लोधी, विधायक स्याना
जांच के लिए लगाई गई है टीम
बड़ी संख्या में स्टाफ की ड्यूटी कोविड टेस्टिंग और घर-घर जांच के लिए लगाई गई है। जिसके चलते उप स्वास्थ्य केंद्रों पर स्टाफ तैनात नहीं हो सका है। गांवों में पहुंचकर लोगों की हर संभव मदद करने का प्रयास किया जा रहा है।
डॉ. भवतोष शंखधर, सीएमओ
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