‘ऑनेस्टी इस दा बेस्ट पालिसी’ के फार्मूले पर चले विधायक सत्यवीर यादव ने विधायक पद ही त्याग दिया था । विधायक ने एसेंबली में विधायको के वेतन और पेंशन वृद्धि का पुरजोर विरोध किया था । बात नहीं बनी तो विधायक सत्यवीर यादव ने विधायक पद से त्याग पत्र ही दे डाला। ईमानदारी और कर्तव्य की राह पर चले विधायक ने जो साहस दिखाया वह आज के परिपेक्ष्य में सपने से कम नहीं है।
इतिहास गवाह है कि जब-जब माननियों के वेतन और भत्तों की वृद्धि का मसला एसेंबली में लाया गया विरोध का स्वर नहीं उठा। 70-80 के दशक में भी विधायकों के वेतन में वृद्धि का खाका खींचा गया। मगर बुलंदशहर के सियासी धुंरधर ने न सिर्फ बढ़ा वेतन लेने से इंकार कर दिया, बल्कि वेतन बढ़ोतरी बिल का पुरजोर विरोध भी किया।
बात नहीं मानी जाने पर विधायक सत्यवीर यादव ने विधायक पद से इस्तीफा ही दे डाला। गांव हरचना निवासी सत्यवीर यादव ने 1974 के विधानसभा चुनाव में जनसंघ के टिकट पर चुनाव लड़ा और सबसे कम उम्र के विधायक चुन लिए गए। 1976 में विधानसभा में विधायकों के वेतन और भत्तों में वृद्धि का बिल रखा गया। सत्यवीर यादव ने बिल का विरोध किया। वेतन भत्तों की वृद्धि पर रोक नहीं लगने के कारण उन्होंने विधायक पद से ही त्याग पत्र दे दिया।
30 साल तक नहीं ली पेंशन
त्याग पत्रित विधायक सत्यवीर यादव ने 30 साल तक पेंशन नहीं ली। वर्ष 2007 में उन्होंने पेंशन लेना शुरू किया है। पेंशन की रकम को विधायक वेल्फेयरकामों में खर्च कर जन सेवा कर रहे हैं। खासतौर पर इस रकम का प्रयोग चेरिटेबल ट्रस्ट क माध्यम से वकील और मुंशियों के उत्थान के लिए करते हैं।
यात्रा कूपन तक लौटा दिए
विधायक सत्यवीर यादव ने परिवार के लिए आए यात्रा कूपनों को भी लौटा दिया। उन्होंने कहा यात्रा कूपनों पर जनता का अधिकार है। पत्नी और बच्चों का अधिकार नहीं है। सत्यवीर सिंह यादव के मुताबिक आज सियासी बेहद गंदी हो गई है। पहले सियासत सेवा थी अब व्यापार बन गया है।